ग़ाज़ीपुर: सदर रोड स्थित डॉ. फतह मुहम्मद के निवास पर ‘तालीमी बेदारी’ के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। अपर श्रमायुक्त कानपुर, शमीम अख्तर की विशेष मौजूदगी में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य समाज के गरीब और वंचित तबके के बच्चों की प्राथमिक शिक्षा और उपलब्ध ढांचागत संसाधनों पर विस्तार से चर्चा करना था।बैठक के दौरान प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को पुनः शिक्षा से जोड़ने तथा उनकी पढ़ाई में आने वाली पारिवारिक एवं सामाजिक बाधाओं को दूर करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को उनके घर के नजदीक लगभग एक किलोमीटर के दायरे में गुणवत्तापरक स्कूली शिक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इस संदर्भ में उत्तर प्रदेश में पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों के लिए श्रम विभाग द्वारा संचालित अटल आवासीय विद्यालयों का विशेष उल्लेख किया गया, जहां नवोदय विद्यालय की तर्ज पर कक्षा 6 से 12 तक निःशुल्क आवासीय शिक्षा दी जाती है।इसके साथ ही, मदरसों के ऐतिहासिक आवासीय शैक्षिक ढांचे पर भी चर्चा हुई। वर्तमान शिक्षा प्रणाली में बदलाव को देखते हुए यह महसूस किया गया कि मदरसों को संस्थागत और संरचनात्मक स्तर पर मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि वहां पढ़ने वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ-साथ आगे की पढ़ाई और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।बैठक के दूसरे चरण में एक शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया, जिसमें प्रख्यात शायर सैफी सलेमपुरी और सरवर मुहम्मदाबादी ने शिक्षा के महत्व पर आधारित अपने कलाम प्रस्तुत किए। इस दौरान तालीमी बेदारी के अध्यक्ष डॉ. वसीम अख्तर ने दोनों शायरों को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया।डॉ. फतह मुहम्मद की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक का संचालन सरवर हुसैन ने किया। बैठक में मास्टर महताब आलम, सरवर हुसैन, अय्यूब अंसारी, नसीम अख्तर, इस्लाहुद्दीन सिद्दीकी, इम्तियाज़ अहमद, नियाज अहमद, जमाल अख्तर, अशरफ अली, डॉ. वसीम अख्तर और डॉ. फतह मुहम्मद समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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