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एमएमएमयूटी गोरखपुर: साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्कता जरूरी, अनजान लिंक और एपीके फाइल से रहें सावधान

लखनऊ। साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे के बीच डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। साइबर अपराधी अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। यह संदेश शुक्रवार को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर में आयोजित तीन दिवसीय साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम के समापन अवसर पर विशेषज्ञों ने दिया। विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के साइबर फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर (सीएफआरसी) और उत्तर प्रदेश पुलिस, गोरखपुर जोन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हुआ। साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के अंतर्गत 21 से 23 अक्टूबर तक चले इस कार्यक्रम में 70 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेषज्ञों ने डिजिटल अरेस्ट, एआई आधारित धोखाधड़ी, फिशिंग, साइबर स्टॉकिंग, सोशल मीडिया अपराध, पहचान की चोरी और ऑनलाइन वित्तीय ठगी के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि साइबर अपराधी ठगी से प्राप्त धन को एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित करने के लिए म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, बैंकिंग पासवर्ड अथवा अन्य गोपनीय जानकारी उपलब्ध नहीं करानी चाहिए। विशेषज्ञों ने अनजान स्रोतों से एपीके फाइल डाउनलोड नहीं करने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले उनकी सत्यता जांचने तथा ऑनलाइन खातों के लिए मजबूत पासफ्रेज का इस्तेमाल करने की सलाह दी। साथ ही मोबाइल फोन, कंप्यूटर और सोशल मीडिया खातों की गोपनीयता एवं सुरक्षा सेटिंग्स को सुरक्षित रखने पर जोर दिया। समापन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या तकनीकी विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक डिजिटल उपयोगकर्ता का दायित्व है। उन्होंने प्रतिभागियों से साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी अपने परिवार, सहकर्मियों और समाज के अन्य लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. विमल कुमार और डॉ. बी.के. शर्मा ने कहा कि तेजी से बदलते डिजिटल परिवेश में साइबर खतरों के प्रति निरंतर जागरूक रहना आवश्यक है। इस कार्यक्रम से प्रतिभागियों को साइबर अपराधों की प्रकृति समझने के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल शोषण से बचाव के व्यावहारिक उपाय सीखने का अवसर मिला। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन, उत्तर प्रदेश पुलिस, विशेषज्ञों, शिक्षकों और प्रतिभागियों के सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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