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लखनऊ विश्‍वविद्यालय में होम्योपैथिक औषधीय पौधों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण के लिए राष्ट्रीय परियोजना का हुआ शुभारम्भ

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय का वनस्पति विज्ञान विभाग एक बार पुनः वनस्पति अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता का परिचय देते हुए होम्योपैथी में प्रयुक्त औषधीय पौधों के मानकीकरण एवं वैज्ञानिक प्रमाणीकरण से संबंधित एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजना का नोडल संस्थान बना है। कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी के संरक्षण तथा वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं परियोजना की प्रधान अन्वेषक प्रो. गौरी सक्सेना एवं सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. कविता अरोड़ा के नेतृत्व में संचालित यह प्रतिष्ठित अनुसंधान परियोजना ₹74,79,320 की लागत से केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (Central Council for Research in Homoeopathy – CCRH), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित है। इस परियोजना का क्रियान्वयन लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में किया जा रहा है। इस सहयोग को औपचारिक रूप प्रदान करने हेतु दोनों संस्थानों के मध्य एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो आयुष क्षेत्र में साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। इस परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय आवश्यक आयुष औषधि सूची (National List of Essential AYUSH Medicines – NLEAM) में सम्मिलित अठारह औषधीय पौधों का व्यवस्थित संग्रहण एवं उनके पारिस्थितिकीय प्रलेखन का कार्य किया जाएगा। इसके लिए भारत के जैव-विविधता से समृद्ध क्षेत्रों, जैसे पश्चिमी घाट, पूर्वी हिमालय तथा पूर्वोत्तर भारत के इंडो-बर्मा जैव-भौगोलिक क्षेत्र में व्यापक क्षेत्रीय सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अभियान संचालित किए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य प्रत्येक प्रजाति के विभिन्न पारिस्थितिक रूपों  का दस्तावेजीकरण करते हुए औषधीय पौधों का एक व्यापक एवं वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भंडार तैयार करना है। भारत की पारम्परिक औषधीय ज्ञान-परम्परा को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ समन्वित करते हुए इस परियोजना के अंतर्गत औषधीय पौधों का आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से गहन अध्ययन किया जाएगा। इसमें प्रत्येक पौधे के बाहरी स्वरूप, पत्तियों, तने, जड़ों तथा फूलों जैसी विशेषताओं के साथ-साथ उसकी आंतरिक संरचना का भी सूक्ष्म स्तर पर परीक्षण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पौधों में पाए जाने वाले महत्त्वपूर्ण रासायनिक तत्वों की भी वैज्ञानिक जांच की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि औषधि बनाने में सही और शुद्ध पौधे का ही उपयोग हो रहा है। इस इन अध्ययनों के आधार पर प्रत्येक औषधीय पौधे के लिए सुदृढ़ पहचान-कुंजियाँ तथा प्रमाणित संदर्भ मानक विकसित किए जाएंगे। परियोजना के अंतर्गत तैयार किए जाने वाले वैज्ञानिक प्रोटोकॉल औषधीय पौधों के कच्चे पदार्थों की सटीक, विश्वसनीय, पुनरुत्पादनीय एवं लागत-प्रभावी पहचान सुनिश्चित करेंगे, जिससे होम्योपैथिक औषधियों की गुणवत्ता, सुरक्षा एवं चिकित्सीय प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वैज्ञानिक नवाचार और भारत की समृद्ध वनस्पति विरासत के इस अद्वितीय समन्वय से यह परियोजना औषधीय पौधों के प्रमाणीकरण एवं गुणवत्ता आश्वासन के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करेगी। साथ ही, यह पहल भारतीय होम्योपैथी की वैज्ञानिक विश्वसनीयता को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ करने के साथ-साथ लखनऊ विश्वविद्यालय को वनस्पति विज्ञान, जैव-विविधता संरक्षण तथा नवाचार आधारित अनुसंधान के अग्रणी संस्थान के रूप में और अधिक प्रतिष्ठित करेगी।

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