वाराणसी! काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 80वां स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह और उल्लास का वातावरण रहा। विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई तथा विश्वविद्यालय के विकास और प्रगति में सार्थक योगदान देने का संकल्प लिया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने ध्वजारोहण किया, जिसके बाद राष्ट्रगान हुआ। समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति जी ने स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए बलिदानों को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और त्याग ने देश को न केवल आजादी दिलाई बल्कि भारतीयों में राष्ट्रीय एकता की भावना को भी मजबूत किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक, भाषाई या व्यावसायिक पृष्ठभूमि भले ही अलग हो, लेकिन प्रत्येक नागरिक की पहली और सर्वोच्च पहचान एक भारतीय के रूप में है। कुलपति जी ने कहा, “15 अगस्त उन सभी महान वीरों को स्मरण करने और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का भी अवसर है, जिन्होंने देश के लिए अपना बलिदान दिया।”प्रो. चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय समुदाय के सदस्यों को बीएचयू के समग्र विकास और प्रगति के लिए समर्पित भाव से कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और गरिमा को बनाए रखना तथा उसे नई ऊंचाइयों तक ले जाना विश्वविद्यालय के प्रत्येक सदस्य की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी हों, शिक्षक, संकाय प्रमुख, विभागाध्यक्ष अथवा कुलपति विश्वविद्यालय के प्रत्येक सदस्य को सामूहिक प्रतिबद्धता और जिम्मेदारी की भावना के साथ इस प्रकार कार्य करना चाहिए कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की गरिमा एवं प्रतिष्ठा सदैव अक्षुण्ण रहे और बीएचयू निरंतर प्रगति एवं नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर होता रहे।कुलपति ने सभी विभागों से अपने-अपने विषय में देश का सर्वश्रेष्ठ विभाग बनने का लक्ष्य निर्धारित करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों को स्वस्थ अकादमिक प्रतिस्पर्धा तथा शोध उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। कुलपति जी ने कहा कि बीएचयू ने शोध की गुणवत्ता और रैंकिंग के क्षेत्र में सुधार किया है लेकिन इस उपलब्धि से संतुष्ट होकर रुकना उचित नहीं होगा बल्कि विश्वविद्यालय को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। कुलपति ने कहा कि शोध उत्कृष्टता के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण भी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की एक पहल के अंतर्गत शिक्षण प्रयोगशालाओं के विकास के लिए शिक्षकों से 120 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इस पहल का उद्देश्य परिसर में शिक्षण एवं अधिगम की गुणवत्ता को और मजबूत एवं बेहतर बनाना है। आउटडोर सीसीटीवी परियोजना की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि यह परियोजना अंतिम चरण में है और इसके माध्यम से सड़कों, आवासीय क्षेत्रों तथा अन्य महत्त्वपूर्ण स्थानों पर निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा। समारोह के दौरान सेंट्रल हिन्दू गर्ल्स स्कूल, सेंट्रल हिन्दू बॉयज स्कूल तथा रणवीर संस्कृत विद्यालय के विद्यार्थियों ने देशभक्ति एवं राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांधा। सेंट्रल हिन्दू गर्ल्स स्कूल की छात्राओं ने ‘Rising Stars’ शीर्षक से महिला विश्व कप 2025 पर आधारित प्रस्तुति के माध्यम से महिला सशक्तीकरण और खेल भावना का संदेश दिया। वहीं, रणवीर संस्कृत विद्यालय के विद्यार्थियों ने भारत के विभिन्न राष्ट्रीय प्रतीकों पर आधारित प्रस्तुति के माध्यम से देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव को अभिव्यक्त किया। सेंट्रल हिन्दू बॉयज स्कूल के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्ण देशभक्ति प्रस्तुति देकर समारोह में उत्साह और राष्ट्रीय गौरव की भावना का संचार किया। एम्फीथिएटर मैदान में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारीगण उपस्थित रहे। उन्होंने देशभक्ति के नारों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का समापन संगीत एवं मंच कला संकाय के डॉ. विजय कपूर द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सिद्धिदात्री भारद्वाज ने किया। इससे पूर्व कुलपति ने मालवीय भवन में ध्वजारोहण किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय केन्द्र में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी सहभागिता की तथा बीएचयू में शिक्षा प्राप्त कर रहे विभिन्न देशों के विद्यार्थियों से संवाद किया। केंद्रीय कार्यालय परिसर में कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। केन्द्रीय कार्यालय के सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता राष्ट्रीय मूल्यों, चरित्र और जिम्मेदारी की भावना में निहित है। हामना के दृष्टिकोण को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य ऐसे जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण करना होना चाहिए, जो राष्ट्र और समाज के प्रति प्रतिबद्ध हों तथा बीएचयू इसी दृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने विश्वविद्यालय के सदस्यों से अपने कार्य को राष्ट्र सेवा के रूप में देखते हुए ईमानदारी, समर्पण और अनुशासन के साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का सुझाव दिया। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में उच्च शिक्षा की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने बीएचयू को नई ऊंचाइयों तक ले जाने और भावी पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार तैयार करने हेतु सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। मुख्य समारोह के उपरांत विश्वविद्यालय परिसर स्थित विभिन्न संकायों एवं संस्थानों में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।
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