वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की एक विशिष्ट शोध टीम ने प्रो. दिनेश चंद्र राय, वरिष्ठ प्रोफेसर एवं बीआर अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति, के नेतृत्व में प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ फूड बायोकेमिस्ट्री में “एक्सप्लोरिंग अल्टरनेटिव प्रोटीन सोर्सेज टुवॉर्ड सस्टेनेबल एंड फ्यूचर न्यूट्रिशन” शीर्षक से एक महत्वपूर्ण समीक्षा लेख प्रकाशित किया है। यह प्रकाशन भारत और ऑस्ट्रेलिया के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों के बीच उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह लेख विशेषांक “वुमन इन फूड साइंस स्पेशल कलेक्शन सी: एडवांसिंग प्रोटीन बेस्ड फूड्स: नॉवेल सोर्सेज, एन्हांस्ड फंक्शनैलिटी एंड सस्टेनेबल सॉल्यूशंस” का हिस्सा है। लेखकों में बीएचयू के डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी विभाग, कृषि विज्ञान संस्थान से उर्वशी विक्रांता, अंकिता हुड्डा तथा अभिषेक दत्त त्रिपाठी; बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी एवं बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से प्रो. दिनेश चंद्र राय; डिकिन विश्वविद्यालय, बर्वुड, ऑस्ट्रेलिया के सीएएसएस फूड रिसर्च सेंटर, स्कूल ऑफ एक्सरसाइज एंड न्यूट्रिशन साइंस से दीपेंद्र कुमार महतो; लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग से प्रदीप कुमार तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी इरविन कॉलेज से अपर्णा अग्रवाल शामिल हैं। इस महत्वपूर्ण शोध उपलब्धि पर जानकारी देते हुए कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने कहा कि यह समीक्षा पारंपरिक एनिमल प्रोटीन के व्यावहारिक विकल्पों के रूप में प्लांट आधारित, सेल आधारित, कल्चर आधारित एवं कीट प्रोटीन आधारित आहारों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें बढ़ती जनसंख्या, जलवायु परिवर्तन के दबाव तथा खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों के बीच उच्च गुणवत्ता वाले, किफायती एवं टिकाऊ प्रोटीन स्रोतों की बढ़ती वैश्विक आवश्यकता को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है। प्रो. राय ने आगे कहा कि ये वैकल्पिक प्रोटीन स्रोत पोषण संबंधी कमियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां पारंपरिक प्रोटीन की उपलब्धता सीमित है। उन्होंने स्पष्ट किया, “विश्वसनीय उत्पादन प्रणालियां, नियामक निकायों की सक्रिय भागीदारी तथा पारदर्शी विनिर्माण मानक अत्यंत आवश्यक हैं। उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाना होगा कि ये प्रोटीन सुरक्षित, पौष्टिक एवं नियमित उपयोग के लिए उपयुक्त हैं। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य ऐसे आहार विकल्पों का विस्तार करना है जो मानव स्वास्थ्य को सुदृढ़ करें और खाद्य प्रणालियों को दीर्घकालिक रूप से सक्षम बनाएं।” उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह समीक्षा आगे के वैज्ञानिक अनुसंधान, उद्योग जगत की रुचि तथा नीति निर्माण को नई दिशा प्रदान करेगी। दोनों विश्वविद्यालयों के विद्वानों एवं पूर्व छात्रों ने इस महत्वपूर्ण शोध उपलब्धि पर प्रो. राय तथा पूरी शोध टीम की इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी है।
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