एम.खालिद
गाजीपुर। भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और अटूट रिश्ते का पावन पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को नंदगंज बाजार एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। सुबह से ही बाजार में त्योहार को लेकर विशेष चहल-पहल देखने को मिली। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र, सुख, समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती नजर आईं। वहीं भाइयों ने भी बहनों की रक्षा करने तथा जीवन के हर सुख-दुःख और कठिन परिस्थिति में उनका साथ देने का संकल्प लिया। रक्षाबंधन को लेकर नंदगंज बाजार की राखी और मिठाई की दुकानों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ लगी रही। विभिन्न प्रकार की रंग-बिरंगी और आकर्षक राखियों से दुकानें सजी रहीं। बहनों ने अपनी पसंद की राखियां खरीदीं और भाइयों के लिए मिठाइयां भी लीं। कई परिवारों में बहनों के आने से घरों में भी उत्सव जैसा माहौल बना रहा। भाइयों ने राखी बंधवाने के बाद बहनों को नगद धनराशि, मिठाई और अन्य उपहार देकर उनके प्रति अपना स्नेह प्रकट किया। रक्षाबंधन केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी के रिश्ते को मजबूत करने वाला त्योहार माना जाता है। इस दिन बहन द्वारा भाई की कलाई पर बांधा गया रक्षा सूत्र आपसी स्नेह और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि वर्षभर भाई-बहन इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं। रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथाओं में भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग प्रमुखता से बताया जाता है। मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लगने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। द्रौपदी के इस स्नेह से प्रभावित होकर श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया था। इसी प्रसंग को भाई-बहन के स्नेह और रक्षा के भाव से जोड़कर देखा जाता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, देवताओं और दानवों के बीच युद्ध के दौरान इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने इंद्र की विजय और सुरक्षा की कामना से उनके हाथ में रक्षा सूत्र बांधा था। इसके बाद इंद्र की विजय हुई। इन कथाओं के कारण भी रक्षा सूत्र को सुरक्षा, विश्वास और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। इतिहास में मेवाड़ की रानी कर्णावती और मुगल बादशाह हुमायूं से जुड़ा प्रसंग भी रक्षाबंधन के संदर्भ में चर्चित है। कहा जाता है कि रानी कर्णावती ने संकट के समय हुमायूं को राखी भेजकर सहायता की अपेक्षा की थी और हुमायूं ने राखी के रिश्ते का सम्मान करते हुए उनकी मदद की थी। रक्षाबंधन का पर्व इसी प्रेम, विश्वास, सम्मान और पारिवारिक एकता की भावना को आगे बढ़ाता है। नंदगंज बाजार और ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों ने आपसी भाईचारे एवं सौहार्द के साथ पर्व मनाया।
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