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लखनऊ विश्वविद्यालय के भौतिकविदों का अंतरराष्ट्रीय शोध जगत में परचम: ‘मैक्सीन’ आधारित नैनोमटेरियल्स पर शोध-समीक्षा पत्र प्रतिष्ठित ‘ACS’ जर्नल में प्रकाशित

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने मैटेरियल साइंस और एडवांस्ड बायोमेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के वरिष्ठ संकाय सदस्य व जाने-माने वैज्ञानिक प्रो. चंद्रकिरण गौतम (Prof. Chandki Ram Gautam) के नेतृत्व में शोध टीम द्वारा टू-डायमेंशनल (2D) मैटेरियल्स—विशेष रूप से मैक्सीन (MXene) एवं मैक्सीन-आधारित कंपोजिट्स—की बायोसेंसिंग और बायोइमेजिंग में उपयोगिता पर तैयार किया गया उच्च स्तरीय शोध-समीक्षा पत्र (Review Article) विश्वविख्यात अमेरिकन केमिकल सोसाइटी (ACS) के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रिसर्च जर्नल ‘ACS Applied Bio Materials’ में प्रकाशित हुआ है। शोध-समीक्षा पत्र पत्र का शीर्षक “A Review on MXene and MXene-Based Composites for Advanced Biosensing and Bioimaging: Progress, Challenges, and Future Perspectives” है। इस शोध कार्य में प्रो. चन्दकीराम गौतम  के साथ शोधार्थी श्वेता (Shweta), रजत कुमार मिश्रा, राखी, अखिलेश्वर गुप्ता एवं विवेक मसीह ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, मैक्सीन (MXene) टू-डायमेंशनल (2D) इनऑर्गेनिक यौगिकों (ट्रांजिशन मेटल कार्बाइड्स, नाइट्राइड्स या कार्बोनाइट्राइड्स) का एक आधुनिक व तेजी से उभरता परिवार है। ग्राफीन की भांति ही इसकी अत्यंत पतली परतदार संरचना होती है, किंतु इसमें धातु जैसी उत्कृष्ट विद्युत चालकता (Metallic Conductivity), समृद्ध सतही रसायन (Surface Chemistry), हाइड्रोफिलिक (जल-आकर्षक) प्रकृति तथा जैव-अनुकूलता (Biocompatibility) जैसे अद्वितीय गुण एक साथ पाए जाते हैं। शोध-समीक्षा पत्र (Review Article) में विस्तार से रेखांकित किया गया है कि जब मैक्सीन को अन्य पॉलीमर्स, बायोमैक्रोमोलीक्यूल्स या मेटल ऑक्साइड्स के साथ मिलाकर ‘नैनोकंपोजिट’ तैयार किया जाता है, तो इसके भौतिक, रासायनिक और ऑप्टिकल गुण कई गुना बढ़ जाते हैं। यह शोध-समीक्षा पत्र (Review Article) आधुनिक चिकित्सा निदान (Medical Diagnostics) की दिशा में अत्यंत दूरगामी साबित होगा। अति-संवेदनशील बायोसेंसर्स (Advanced Biosensors): मैक्सीन कंपोजिट्स की मदद से ऐसे नैनो-बायोसेंसर विकसित किए जा सकते हैं, जो रक्त व शरीर के अन्य जैविक तरलों में मौजूद ग्लूकोज, यूरिया, कोलेस्ट्रॉल, डीएनए, आरएनए, न्यूरोट्रांसमीटर्स तथा संक्रामक वायरस व बैक्टीरिया की अत्यंत सूक्ष्म मात्रा को भी तुरंत और सटीक रूप से पहचान सकते हैं। कैंसर मार्करों की शुरुआती पहचान: कैंसर कोशिकाओं द्वारा स्रावित विशिष्ट प्रोटीन और बायोमार्कर्स की शुरुआती अवस्था में ही पहचान करने में मैक्सीन-सेंसर गेम-चेंजर सिद्ध हो रहे हैं। उन्नत बायोइमेजिंग व थेरानोस्टिक्स: फ्लोरोसेंस इमेजिंग, फोटो-थर्मल थेरेपी और एमआरआई (MRI)/सीटी स्कैन में कंट्रास्ट एजेंट के रूप में मैक्सीन कंपोजिट्स का उपयोग शरीर के भीतर ट्यूमर और प्रभावित ऊतकों (Tissues) की स्पष्ट व हाई-रिजॉल्यूशन थ्री-डायमेंशनल इमेजिंग प्रदान करता है। शोध-समीक्षा पत्र (Review Article) में मैक्सीन के व्यावहारिक और क्लीनिकल अनुप्रयोगों से जुड़ी चुनौतियों पर भी विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है। प्रो. चंद्रकिरण गौतम और टीम ने बताया कि मैक्सीन के बड़े पैमाने पर उत्पादन, वातावरण में इसके ऑक्सीकरण (Oxidation) को रोकने, दीर्घकालिक रासायनिक स्थिरता बनाए रखने और मानव शरीर में इसके प्रभाव (Toxicity & Biodegradability) का गहराई से मूल्यांकन किया जाना अत्यंत आवश्यक है। इस दिशा में हरित संश्लेषण (Green Synthesis) और उन्नत सरफेस इंजीनियरिंग भविष्य के नए द्वार खोल रहे हैं। दभौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. चन्दकीराम गौतम ने कहा कि प्रयोगशाला स्तर पर 2D नैनोमटेरियल्स की समझ विकसित कर उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों से जोड़ना समय की मांग है। मैक्सीन आधारित बायोसेंसर्स आने वाले समय में ‘पॉइंट-ऑफ-केयर’ (PoC) डायग्नोस्टिक उपकरणों और पहनने योग्य (Wearable) हेल्थ मॉनिटरिंग डिवाइसेज के निर्माण को सुगम और किफायती बनाएंगे, जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति तक त्वरित और सस्ती स्वास्थ्य जांच सुविधाएं पहुंच सकेंगी। प्रतिष्ठित ACS जर्नल में इस शोध-समीक्षा पत्र (Review Article) के प्रकाशन पर विश्वविद्यालय परिवार, शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने प्रो. चंद्रकिरण गौतम और उनकी संपूर्ण शोध टीम को बधाई दी है। Contact :884 038 9015 Prof C R Gautam

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