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डिजाइन पेटेंट के रूप में पंजीकृत हुआ एमएमएमयूटी के शोधकर्ता का अभिनव शोध, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नई उपलब्धि

लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT), गोरखपुर के डॉ. वरुण कुमार सिंह द्वारा सौर तापीय (Solar Thermal) ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए अभिनव शोध को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय (Intellectual Property Office, Government of India) द्वारा डिजाइन पंजीकरण (Design Registration) प्रदान किया गया है। यह पंजीकरण “Helical Heat Transfer of Parabolic Collector Device” शीर्षक से किया गया है, जो नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) एवं सतत विकास (Sustainable Development) की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस शोध एवं डिजाइन के विकास में आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी के प्रो. जीवन वचन तिरके, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, बांदा के डॉ. राम जी त्रिपाठी तथा एमएमएमयूटी, गोरखपुर के शोधार्थी श्री सूरज का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। सभी के संयुक्त प्रयासों से विकसित इस नवाचार को भारत सरकार ने डिजाइन संरक्षण प्रदान किया है। डिजाइन पंजीकरण प्रमाणपत्र के अनुसार इस नवाचार को डिजाइन संख्या 486753-001 के अंतर्गत क्लास 23-03 में पंजीकृत किया गया है। यह पंजीकरण इस उपकरण की विशिष्ट संरचना (Configuration) एवं डिजाइन की मौलिकता को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।

क्या है “Helical Heat Transfer of Parabolic Collector Device”?

यह एक उन्नत पैराबोलिक सोलर कलेक्टर (Parabolic Solar Collector) आधारित तापीय उपकरण है, जिसमें हेलिकल (कुंडलीनुमा) हीट ट्रांसफर पाइप का उपयोग किया गया है। सामान्य सौर कलेक्टरों की तुलना में इसकी हेलिकल संरचना ऊष्मा के आदान-प्रदान (Heat Transfer) की क्षमता को अधिक प्रभावी बनाती है। इससे सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग संभव होता है तथा कम समय में अधिक तापीय ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। यह तकनीक ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) बढ़ाने के साथ-साथ ऊष्मा हानि (Heat Loss) को कम करती है, जिससे संपूर्ण प्रणाली का प्रदर्शन बेहतर होता है। यह नवाचार भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन (Clean Energy Mission), राष्ट्रीय सौर ऊर्जा कार्यक्रम तथा नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्यों को गति देने में सहायक हो सकता है। इस तकनीक के माध्यम से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी तथा पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा प्रणालियों को बढ़ावा मिलेगा।

इसका उपयोग निम्न क्षेत्रों में विशेष रूप से किया जा सकता है—

सौर जल तापक (Solar Water Heating Systems)

औद्योगिक प्रक्रिया ताप (Industrial Process Heating)

कृषि उत्पादों का सौर सुखाने (Solar Drying)

डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

सामुदायिक रसोई एवं संस्थागत भवन

ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा समाधान

कम लागत वाले तापीय ऊर्जा अनुप्रयोग

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तकनीक का बड़े स्तर पर व्यावसायीकरण किया जाता है तो यह भारत में ऊर्जा संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा हरित प्रौद्योगिकी (Green Technology) को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस उपलब्धि पर शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं ने डॉ. वरुण कुमार सिंह एवं उनकी पूरी शोध टीम को बधाई देते हुए इसे भारतीय तकनीकी अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। यह सफलता दर्शाती है कि विश्वविद्यालयों एवं तकनीकी संस्थानों में विकसित अनुसंधान अब प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर उद्योग एवं समाज के लिए उपयोगी तकनीकों के रूप में सामने आ रहे हैं।

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