गाजीपुर। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व ही नहीं,बल्कि रक्षा और मंगलकामना का भी प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधकर उसके सुख,स्वास्थ्य,समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती है। इसके बदले भाई अपनी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता है। राखी बांधने से पहले बहन भाई को रोली या कुमकुम का तिलक लगाती है,अक्षत चढ़ाती है, आरती उतारती है।इसके बाद राखी बांध कर मिठाई खिलाती हैं।भाई भी बहन को अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार देतें है।भाई-बहन के अटूट प्रेम,विश्वास,सुरक्षा और संकल्प के प्रतीक पर्व के दिन भद्रा काल का विशेष महत्व माना गया है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में शुभ एवं मांगलिक कार्यों से परहेज़ किया जाता है, इसलिए घर परिवार के बड़े बुजुर्गों राखी बांधने के लिए भी शुभ मुहूर्त का ध्यान रखने की सलाह देते हैं।मान्यता है कि भद्रा काल समाप्त होने के बाद शुभ समय में राखी बांधने से भाई-बहन के रिश्ते में सुख,समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। इसलिए इस पावन पर्व पर पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त जानकर ही रक्षा सूत्र राखी भाई की कलाई पर बहन बांधती है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन का त्योहार राजा बलि और माता लक्ष्मी से भी संबंधित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार लक्ष्मी जी ने राजा बलि को रक्षासूत्र राखी बांधकर अपना भाई बनाया।आइए चलते हैं तीन दशक पीछे…खत वाली राखी की वो खूबसूरत यादें…पहले जमाने में बहनें अपने भाई को प्यार और दुआएँ भेजने के लिए डाक से खत वाली राखी,यानी राखी का ग्रीटिंग कार्ड भारतीय पोस्ट “डाकघर” से घर परिवार से दूर रोजी रोटी के चक्कर मे रहने वाले भाई के लिए भेजती थीं।उस कार्ड पर सुंदर-सी राखी चिपकी होती थी और साथ में रोली की छोटी पुड़िया भी।बहनें अपने हाथों से उसमें भाई के लिए प्यार भरे संदेश, शुभकामनाएँ और ढेरों दुआएँ लिखती थीं।घर से बाहर सुदूर प्रान्तों में रहने वाले भाई भी उस खत के आने की राह देखते थे।जब डाकिया राखी लेकर आता,तो सिर्फ एक कार्ड नहीं आता था,उसमें बहन का प्यार, उसकी यादें और अपनापन भी आता था।भाई उस राखी और खत को बड़े प्यार से संभालकर रखते थे।वो खत भाई-बहन के रिश्ते की एक अनमोल याद बन जाता था।आज समय बदल गया है।फोन और वीडियो कॉल ने दूरियाँ कम कर दीं,ऑनलाइन राखी और मैसेज भेजे जाने लगे हैं।हाथ से लिखे खत और डाकिए के इंतज़ार का चलन धीरे-धीरे कम हो गया।राखी तो आज भी आती है,मगर वो खतों में छुपा प्यार,इंतज़ार,अपनापन,हाथ से लिखे अल्फ़ाज़ों का एहसास अब दूर-दूर तक देखने को नही मिलता।जिनके पास आज भी राखी का कोई पुराना खत है।उस खत को पढ़कर उनके चेहरे पर मुस्कान,आँखों में नमी आ जाती है।
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