वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में “उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला आईआईटी कानपुर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी तथा छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई, जिसकी मेज़बानी आईआईटी कानपुर के सेंटर फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड टीचिंग एक्सीलेंस (सर्टेक्स) ने की। कार्यशाला में उद्घाटन संबोधन आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी तथा सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने दिया। प्रो. चतुर्वेदी ने शिक्षा तक पहुँच का विस्तार करने, शोध को गति देने तथा शिक्षकों और विद्यार्थियों को ज्ञान का सह-सृजक बनाने में एआई की क्षमता पर प्रकाश डाला। प्रो. पाठक ने इस बात पर बल दिया कि एआई का उपयोग यह आकलन करने के लिए किया जाए कि विद्यार्थी वास्तव में क्या जानते हैं, तथा उन्होंने स्थानीय भाषाओं में शिक्षा के लिए स्वदेशी एआई उपकरण विकसित करने का आह्वान किया। कार्यशाला में आईआईटी कानपुर, बीएचयू वाराणसी तथा सीएसजेएमयू कानपुर के अनेक विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने प्रतिभागिता की, जिनमें बीएचयू के विभिन्न विभागों से 25 विद्यार्थी और 15 संकाय सदस्य शामिल थे। बीएचयू के कंप्यूटर विज्ञान विभाग की प्रो. मंजरी गुप्ता, एवं शिक्षा संकाय से डॉ. सोमू सिंह तथा डॉ. प्रतीक चौरसिया ने रिसोर्स पर्सन के रूप में सहभागिता की और उच्च शिक्षा में एआई के उपयोग तथा वर्तमान युग में एआई के नैतिक उपयोग पर अपने विचार एवं अनुभव साझा किए। इसके साथ ही आईआईटी कानपुर और सीएसजेएमयू के संकाय सदस्यों द्वारा विभिन्न सत्रों का संचालन किया गया। कार्यशाला के सुचारु संचालन हेतु आयोजन समिति के सदस्यों, आईआईटी कानपुर से प्रो. मनोज हरबोला एवं प्रो. आदित्य जगन्नाथम तथा बीएचयू से डॉ. प्रतीक चौरसिया, ने समन्वय किया।
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