गाजीपुर। जनपद के सेवराई तहसील अंतर्गत नौली, उतरौली एवं त्रिलोकपुर क्षेत्र स्थित श्री रुद्रांबिका धाम परिसर में सोमवार, 26 अक्टूबर को नौ दिवसीय श्री रुद्रांबिका महायज्ञ एवं श्रीराम कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। आयोजन के प्रथम दिन प्रातः आठ बजे यज्ञ स्थल से भव्य जल यात्रा एवं शोभायात्रा निकाली गई। इसमें सैकड़ों की संख्या में महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हाथी-घोड़े, बैंड-बाजे, पीत वस्त्र धारण किए श्रद्धालु और सिर पर कलश रखकर चलतीं महिलाएं शोभायात्रा के प्रमुख आकर्षण रहे। शोभायात्रा श्री रुद्रांबिका धाम परिसर स्थित यज्ञ स्थल से प्रारंभ होकर नौली इंटर कॉलेज पहुंची। इसके बाद नौली, त्रिलोकपुर, व उतरौली गांव का भ्रमण करते हुए शोभा यात्रा सिवान के रास्ते पुनः रुद्रांबिका धाम परिसर स्थित यज्ञ स्थल पर पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। शोभायात्रा के गुजरने के दौरान जगह-जगह लोगों ने स्वागत किया और घरों की छतों से पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया। पीत वस्त्र धारण कर सिर पर कलश रखकर चल रहीं माताएं-बहनें मंगलगीत गा रही थीं। वहीं, बैंड-बाजे की धुन और धार्मिक गीतों के बीच ‘काली माता की जय’, ‘गंगा मैया की जय’ तथा ‘सनातन धर्म की जय’ के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। हाथी-घोड़ों से सुसज्जित शोभायात्रा का दृश्य अत्यंत मनोहारी रहा। श्रद्धालुओं की सहभागिता और लोगों की पुष्पवर्षा ने इस धार्मिक आयोजन को विशेष बना दिया। इस अवसर पर यज्ञाचार्य डॉ. पंडित धनंजय पांडेय ने कलश यात्रा के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन परंपरा में कलश को पवित्रता, मंगल और देवत्व का प्रतीक माना गया है। उन्होंने कहा कि कलश यात्रा में श्रद्धापूर्वक शामिल होना पुण्य का कार्य है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश में तैंतीस कोटि देवताओं का वास माना जाता है। सिर पर कलश धारण कर यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना की जाती है। उन्होंने कहा कि जब श्रद्धालु पूर्ण आस्था और समर्पण के साथ यज्ञ जैसे पवित्र आयोजन में सहभागी बनते हैं, तो इससे धार्मिक चेतना मजबूत होती है और परिवार एवं समाज में सद्भाव का वातावरण बनता है। श्री रुद्रांबिका धाम परिसर में आयोजित श्री रुद्रांबिका महायज्ञ एवं श्रीराम कथा का कार्यक्रम 26 अक्टूबर से 4 नवंबर तक चलेगा। आयोजन के दौरान धार्मिक अनुष्ठान एवं श्रीराम कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया जाएगा। कार्यक्रम का समापन 4 नवंबर को पूर्णाहुति, प्रसाद वितरण एवं महाभंडारे के साथ होगा। इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में क्षेत्र वासियों सहित अन्य सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण बना हुआ है।
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