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भारतीय ज्ञान परंपरा से ही संभव है विकसित भारत और विश्वगुरु बनने का मार्ग : पद्मश्री प्रो. मंगला कपूर

वाराणसी। नमों विकसित भारत संवाद के तहत आयोजित तीन दिवसीय ‘इंडियन कल्चरल इनोवेशन्स कॉन्क्लेव-2026’ (ICIC-2026) का बुधवार को अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के बुद्धा सभागार में समापन हुआ। समापन समारोह की मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. मंगला कपूर रहीं। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि विकसित भारत और विश्वगुरु बनने का मार्ग भारतीय ज्ञान परंपरा से ही संभव है। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं के पूर्व भारत की शिक्षा पद्धति, ज्ञान और जीवनचर्या वैज्ञानिक एवं समावेशी थी।प्रो. कपूर ने भारतीय संगीत और नाट्यशास्त्र की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि ये प्राचीन भारत की प्रदर्शन कलाओं, संगीत और रंगमंच के मूल आधार हैं। उन्होंने बताया कि नाट्यशास्त्र की रचना ऋषि भरत मुनि ने लगभग 400 ईसा पूर्व की थी। उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत में ऐसी शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन और सोच की दिशा को बदल सकती है।कार्यक्रम में डॉ. गीता योगेश भट्ट ने ‘योगाचार से नवाचार’ विषय पर अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि यह भारतीय शास्त्र-परंपरा की वह गहरी धारा है, जिसमें चेतना अर्थात चित्त को सृजन का मूल स्रोत माना गया है। आज का नवाचार भी चित्त की नई संरचना से ही जन्म लेता है। उन्होंने कहा कि लगभग 200 ईसा पूर्व महर्षि पतंजलि ने बिखरी हुई योग परंपराओं को सूत्रबद्ध कर योगसूत्र के रूप में एक स्वतंत्र दर्शन की स्थापना की। आज पूरी दुनिया योग को अपना रही है।विशिष्ट अतिथि चिकित्सक डॉ. मोनिका मोहिनानी ने गर्भाधान संस्कार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राचीन भारत में यह हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में पहला संस्कार माना जाता था, जिसका उद्देश्य स्वस्थ और संस्कारवान संतान की प्राप्ति था। उन्होंने कहा कि हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा को आज दुनिया वैज्ञानिक दृष्टि से स्वीकार कर रही है, जबकि हम स्वयं उसे पुरानी सोच मानने लगे हैं।इस अवसर पर डॉ. दिव्या सिंह, डायरेक्टर सारा (SARA), साईं इंस्टीट्यूट के अजय कु. सिंह तथा फिल्म निर्देशक उमेश भाटिया ने भी अपने विचार रखे। चेयरमैन अशोका इ. अंकित मौर्या ने अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर अशोका इंस्टीट्यूट के इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप फाउंडेशन द्वारा आयोजित इंटरनल हैकाथॉन-2025 में चयनित 22 प्रोजेक्ट एवं इनोवेशन मॉडल को आमंत्रित उद्यमियों और तकनीकी विशेषज्ञों के समक्ष छात्रों व्दारा प्रस्तुत किया गया। ये सभी प्रोजेक्ट एवं मॉडल अशोका इंस्टीट्यूट के छात्रों द्वारा तैयार किए गए हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन व माल्यार्पण से हुआ। स्वागत भाषण एवं विषय प्रवर्तन डायरेक्टर अशोका डॉ. सारिका श्रीवास्तव ने किया। संचालन असिस्टेंट प्रो. गौरव कुशवाहा एवं प्रो. हसीबउद्दीन ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डीन सीएसई डॉ. एल.एस. मौर्या ने किया। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम संयोजक डॉ अपर्णा सिंह ने उपस्थित सबका आभार व्यक्त किया।

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