वाराणसी। अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नई दिल्ली के सहयोग से शनिवार को एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूर्वी उत्तर प्रदेश के 31 फार्मेसी कॉलेजों के 200 से अधिक शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का विषय “एनईपी 2020 के अनुसार बी. फार्म सिलेबस (2026) का प्रभावी क्रियान्वयन : चुनौतियाँ और अवसर” रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली के वाइस-प्रेसिडेंट जशुभाई एच. चौधरी रहे। उन्होंने कहा कि फार्मेसी शिक्षा को बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना जरूरी है। एनईपी-2020 के अनुरूप बी.फार्मा पाठ्यक्रम-2026 का प्रभावी क्रियान्वयन शिक्षकों और संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को नई शिक्षण पद्धतियों और बदलती शैक्षणिक आवश्यकताओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशिष्ट अतिथि प्रो. विभु साहनी, सेंट्रल काउंसिल सदस्य एवं चेयरमैन, फाइनेंस कमिटी, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा कि फार्मेसी शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण एवं परिणाम आधारित शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण को विद्यार्थियों की बेहतर शिक्षा के लिए आवश्यक बताया। साथ ही कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर फार्मेसी पेशेवर बनाने के लिए शिक्षण के साथ व्यावहारिक ज्ञान और नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है। कार्यक्रम में आए अतिथियों का स्वागत चेयरमैन अशोका इ.अंकित मौर्या और वाइस चेयरमैन डॉ.अमित मौर्या ने अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर किया। तकनीकी सत्र में डॉ. अनूप किशोर, ने फार्मेसी पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समावेश पर चर्चा की। वहीं डॉ. वी. के. मौर्य, पूर्व प्राचार्य, गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ फार्मेसी, औरंगाबाद ने एनईपी, परिणाम आधारित शिक्षा और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रशिक्षण दिया। डॉ. शरत चंद्रन, आदि लोगों ने बी.फार्मा पाठ्यक्रम-2026 एवं एनईपी-2020 के अनुरूप उसकी रूपरेखा पर जानकारी दी। कार्यक्रम की शुरुआत अशोका के डायरेक्टर-फार्मेसी डॉ. बृजेश सिंह के स्वागत संबोधन व विषय प्रवर्तन से हुआ। एफडीपी का संचालन असिस्टेंट प्रो मौलश्री भण्डारी व मनीष दुबे ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ अवनीश श्रीवास्तव ने किया।

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