लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पेपरलेस, पारदर्शी और तीव्र बनाने के उद्देश्य से सफलतापूर्वक लागू की गई ‘ई-ऑफिस’ (e-Office) प्रणाली का दायरा अब संबद्ध महाविद्यालयों तक बढ़ाया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्णय लिया है कि संबद्धता वाले चारों प्रमुख जनपदों—लखनऊ, सीतापुर, हरदोई एवं लखीमपुर खीरी के संबद्ध महाविद्यालयों को ई-ऑफिस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। प्रशासनिक प्राथमिकताओं और चरणबद्ध योजना के तहत फिलहाल प्रथम चरण में केवल चारों जिलों के सभी ‘राजकीय डिग्री कॉलेजों’ (Government Colleges) को ही विश्वविद्यालय के ई-ऑफिस से सीधे जोड़ा जाएगा। शेष सहायता प्राप्त (Aided) एवं स्ववित्तपोषित (Self-Financed) महाविद्यालयों को इस डिजिटल नेटवर्क में आगामी चरणों में शामिल किया जाएगा। कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी के निर्देशानुसार राजकीय महाविद्यालयों को ई-ऑफिस पोर्टल पर ऑनबोर्ड करने, डिजिटल सिग्नेचर (DSC), यूजर मैपिंग तथा तकनीकी मार्गदर्शन की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय की प्रोग्रामर श्रीमती अनुपमा सक्सेना को सौंपी गई है। वे राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों और नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर इस व्यवस्था को धरातल पर क्रियान्वित करेंगी। कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने कहा कि “लखनऊ विश्वविद्यालय का लक्ष्य आधुनिक गवर्नेंस, जवाबदेही और डिजिटल कार्यप्रणाली को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है। परिसर में ई-ऑफिस की सफलता के बाद अब प्रथम चरण में हम चारों जिलों के राजकीय महाविद्यालयों को सीधे जोड़ रहे हैं। इसके उपरांत अन्य महाविद्यालयों को भी चरणबद्ध तरीके से इस नेटवर्क से आच्छादित किया जाएगा। राजकीय महाविद्यालयों के ई-ऑफिस से जुड़ने से सुदूर क्षेत्रों के प्राचार्यों और शिक्षकों को सामान्य पत्रावलियों के लिए मुख्यालय की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। प्रत्येक फाइल का समयबद्ध, पारदर्शी और डिजिटल निस्तारण सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
राजकीय डिग्री कॉलेजों को ई-ऑफिस से जुड़ने पर मिलने वाले प्रमुख फायदे:
- पत्रावलियों का त्वरित डिजिटल निस्तारण (Fast Processing):
राजकीय महाविद्यालयों से आने वाले नवीन विषय अनुमोदन, सीट आवंटन, पद सृजन, एनओसी और विभिन्न प्रशासनिक प्रस्ताव अब डाक या व्यक्तिगत रूप से भेजने के बजाय एक क्लिक में संबंधित अधिकारी के डिजिटल पटल पर पहुंचेंगे।
- रियल-टाइम फाइल ट्रैकिंग और पारदर्शिता (Live Tracking & Transparency):
कॉलेज प्रशासन को सिस्टम पर स्पष्ट दिखेगा कि उनकी फाइल किस स्तर या अधिकारी के पास लंबित है। डिजिटल टाइम-स्टैम्प दर्ज होने से फाइलों के अनावश्यक लंबित रहने पर रोक लगेगी।
- समय और वित्तीय संसाधनों की बचत:
सीतापुर, हरदोई और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों के राजकीय कॉलेजों के प्राचार्यों व कर्मचारियों को कागजी पत्रावलियों की पैरवी के लिए लखनऊ आने-जाने में लगने वाले समय और यात्रा व्यय से स्थाई मुक्ति मिलेगी।
- दस्तावेजों की शत-प्रतिशत सुरक्षा (Zero Data Loss):
कागजी फाइलों के फटने, खराब होने या मिसप्लेस होने का जोखिम समाप्त हो जाएगा। सभी पत्राचार का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड और ऑडिट ट्रेल स्थायी रूप से उपलब्ध रहेगा।
- छात्र-हितों का त्वरित समाधान:
राजकीय कॉलेजों के विद्यार्थियों के माइग्रेशन, विषय-परिवर्तन, स्कॉलरशिप सत्यापन और खेल व सांस्कृतिक आयोजनों की अनुमतियां बिना किसी देरी के समय पर निस्तारित हो सकेंगी।
- पर्यावरण संरक्षण एवं पेपरलेस व्यवस्था:
हजारों पन्नों के कागजी पत्राचार, प्रिंटिंग और कूरियर के खर्च में भारी कमी आएगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रीन गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जल्द ही संबद्ध चारों जिलों के राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों व तकनीकी स्टाफ के लिए ई-ऑफिस संचालन संबंधी विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
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