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मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए बनायेगा सचल कम्‍प्‍यूटर लैब

लखनऊ। मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और डिजिटल दक्षता बढ़ाने के लिए एक अनूठी पहल करने जा रहा है। इस पहल में एम एम एम यू टी को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का भी साथ मिलेगा। योजना के मुताबिक एम एम एम यू टी एक मोबाइल (सचल) कम्प्यूटर लैब बनाएगा। इसके लिए एम एम एम यू टी एक बड़ी सी एन जी बस खरीद कर उसे कंप्यूटर लैब में परिवर्तित करेगा। इस सचल कम्प्यूटर लैब का नाम ‘ Wisdom on Wheels (WOW) Digital Lab’ (विजडम ऑन व्हील्स (वाओ) डिजिटल लैब) रखा जाएगा। इस लैब में उच्च गुणवत्ता के 16 कंप्यूटर, एक मल्टीफंक्शन प्रिंटर सहित 1 घंटे के पावर बैकअप के लिए यू पी एस, और वाई फाई की सुविधा होगी। बस को सुविधाजनक बनाने के लिए ए सी भी लगा होगा। परियोजना पर कुल रु. 70 लाख की लागत अनुमानित है जिसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व कोष से वहन करेगा। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने एम एम एम यू टी की इस पहल में सहभागिता के लिए सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है। विस्तार से जानकारी देते हुए अधिष्ठाता, विस्तार गतिविधियां एवं पुरातन छात्र संबंध प्रो जय प्रकाश ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य आम जन विशेषकर ग्रामीण समुदायों को बुनियादी डिजिटल कौशल, जैसे कंप्यूटर उपयोग, इंटरनेट उपयोग, और कंप्यूटर पर सामान्य उपयोगी काम काज करना सिखाना है। साथ ही, ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर खतरों से बचाव और डिजिटल रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना भी इस परियोजना के उद्देश्यों में शामिल है। यह पहल ग्रामीण युवाओं को डिजिटल दुनिया में शामिल कर, उनके लिए व्यक्तिगत और पेशेवर विकास के नए अवसर खोलेगी। इस परियोजना को लागू करने के लिए विश्वविद्यालय ने एक सुनियोजित कार्ययोजना तैयार की है। इसके लिए एम एम एम यू टी सबसे पहले स्थानीय समुदायों की डिजिटल आवश्यकताओं और वर्तमान डिजिटल कौशल का आकलन करेगा। इसके बाद, एम एम एम यू टी के कम्प्यूटर साइंस एवं साइबर विशेषज्ञ पाठ्यक्रम विकसित करेंगे जिसमें बुनियादी डिजिटल कौशल, ऑनलाइन सुरक्षा, रचनात्मक अनुप्रयोग आदि शामिल होंगें। विश्वविद्यालय द्वारा तैयार करवायी गई सचल कम्प्यूटर लैब गांवों में जाएगी और इस पाठ्यक्रम के आधार पर प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन विश्वविद्यालय के अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा किया जाएगा, और अभ्यास के लिए कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर और ऑनलाइन संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रतिभागियों की प्रगति का मूल्यांकन और प्रतिक्रिया के आधार पर कार्यक्रम को बेहतर बनाया जाएगा। लैब के संचालन का सारा व्यय विश्वविद्यालय अपने स्त्रोतों से वहन करेगा। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो जे पी सैनी ने कहा कि “विश्वविद्यालय ने पहले भी कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण समुदायों के लिए कई सामाजिक पहल शुरू की हैं, और यह परियोजना उसी दिशा में एक और बड़ा कदम है। यह परियोजना ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल असमानता को कम करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुझे विश्वास है कि विश्वविद्यालय द्वारा एस बी आई के सहयोग से स्थापित विजडम ऑन व्हील्स लैब एक सशक्त और सक्षम डिजिटल समुदाय का निर्माण करने में सफल होगी जो डिजिटल इंडिया के स्वप्न को साकार करने की दिशा में सहायक होगी।”

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