लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एम.एम.एम.यू.टी.), गोरखपुर एवं अटल बिहारी वाजपेयी-भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान (ए.बी.वी.-आई.आई.आई.टी.एम.), ग्वालियर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय आई.सी.ई.³–2025 (इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग) का भव्य शुभारंभ आज विश्वविद्यालय परिसर स्थित अटल भवन में हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11:30 बजे माँ सरस्वती एवं महामना मदन मोहन मालवीय जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। तत्पश्चात सरस्वती वंदना एवं विश्वविद्यालय कुलगीत ने वातावरण को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। आयोजन अध्यक्ष प्रो० एस. के. सोनी ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया, जबकि प्रो० प्रभाकर तिवारी ने सम्मेलन की रूपरेखा और उद्देश्य पर विस्तार से जानकारी दी। इसके उपरांत सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन किया गया और औपचारिक उद्घाटन की घोषणा की गई। विशिष्ट अतिथि प्रो० एस. एन. सिंह ने अपने उद्बोधन में विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के क्षेत्र में वैश्विक शोध एवं नवाचारों के महत्व को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि प्रो० भीम सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण में नवीकरणीय ऊर्जा और उभरती तकनीकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत तकनीकी क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर सकता है और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने EV चार्जिंग स्टेशनों में सौर ऊर्जा के उपयोग की संभावनाओं तथा विभिन्न मोटरों से संचालित सोलर वॉटर पंप की प्रासंगिकता को समझाया। उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रदूषण नियंत्रण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। साथ ही, ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नए उद्योग और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। प्रो० आर. सी. बंसल ने नवीकरणीय ऊर्जा विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि सौर, पवन और बायो-एनर्जी जैसी तकनीकें भारत को भविष्य का क्लीन एनर्जी लीडर बना सकती हैं। उन्होंने आगे कहा कि यदि उद्योग और अकादमिक जगत मिलकर काम करें तो आने वाले दशक में भारत ऊर्जा निर्यातक राष्ट्र के रूप में उभर सकता है। विश्वविद्यालय के कुलपति एवं ICE3–2025 के संरक्षक प्रो० जे. पी. सैनी ने इस सम्मेलन को शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों के लिए एक साझा मंच बताते हुए कहा कि यह मंच तकनीकी विकास और नवाचार को गति प्रदान करेगा। अंत में गणमान्य अतिथियों को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सह-अध्यक्ष एवं सचिव डॉ० शिखा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस आयोजन में सह-अध्यक्ष एवं सचिव डॉ० मीनाक्षी चौधरी, डॉ० नवदीप सिंह, डॉ० विनोद कुमार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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