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गाजीपुर: इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 के खिलाफ बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने किया प्रदर्शन

गाजीपुर। प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 के विरोध में आज उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने व्यापक प्रदर्शन, धरना और विरोध सभाएँ आयोजित की। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति गाजीपुर के पदाधिकारी ने बताया कि ये प्रदर्शन नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE) के आह्वान पर लाल दरवाजा पावर हाउस स्थित सर्किल ऑफिस प्रांगण में  आयोजित किए गए।उन्होंने बताया कि  देश के विभिन्न राज्यों व प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिजलीघरों, ट्रांसमिशन केंद्रों, वितरण कार्यालयों तथा जिला मुख्यालयों पर बिजली कर्मचारी और इंजीनियर बड़ी संख्या में एकत्र हुए और प्रस्तावित कानून की कड़ी निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने बिल को किसान विरोधी, उपभोक्ता विरोधी और कर्मचारी विरोधी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।इस अवसर पर बोलते हुए संघर्ष समिति के वक्ताओं ने एक स्वर में  कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 का मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजीकरण को बढ़ावा देना और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस बिल के गंभीर परिणाम देश के किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों पर पड़ेंगे।संघर्ष समिति ने कहा कि प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार पांच वर्षों के भीतर क्रॉस-सब्सिडी समाप्त करने से कृषि उपभोक्ताओं के बिजली दरों में भारी वृद्धि होगी। वर्तमान में सिंचाई के लिए रियायती बिजली पाने वाले किसानों को अधिक बिजली शुल्क देना पड़ेगा, जिससे कृषि उत्पादन लागत बढ़ेगी और ग्रामीण संकट और गहरा सकता है। निजी वितरण कंपनियाँ ग्रामीण और कम राजस्व वाले कृषि क्षेत्रों में सेवा देने से बच सकती हैं, जिससे गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि एक ही क्षेत्र में एकाधिक वितरण लाइसेंस देने की व्यवस्था से निजी कंपनियाँ केवल अधिक भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को चुनेंगी, जबकि घाटे वाले उपभोक्ता सार्वजनिक वितरण कंपनियों के पास रह जाएंगे। क्रॉस-सब्सिडी समाप्त होने से घरेलू उपभोक्ताओं, विशेषकर कम आय वाले परिवारों के लिए बिजली दरों में भारी वृद्धि होगी। इससे बिजली एक सामाजिक सेवा के बजाय मुनाफे पर आधारित व्यापार बन जाएगी और सभी के लिए सस्ती बिजली की उपलब्धता प्रभावित होगी।संघर्ष समिति ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह बिल बिजली वितरण के पिछले दरवाजे से निजीकरण का रास्ता खोलता है, जिससे हजारों बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की नौकरी और सेवा शर्तों पर खतरा उत्पन्न होगा। निजीकरण के पिछले अनुभव बताते हैं कि इससे कर्मचारियों की संख्या में कटौती, ठेका प्रथा में वृद्धि और सेवा शर्तों में गिरावट आती है। साथ ही, लाभकारी उपभोक्ताओं के निजी कंपनियों की ओर जाने से सार्वजनिक वितरण कंपनियाँ आर्थिक रूप से कमजोर होंगी।संघर्ष समिति ने यह भी चेतावनी दी कि यह बिल देश की संघीय व्यवस्था को कमजोर करता है। संविधान के अनुसार बिजली समवर्ती सूची का विषय है, लेकिन इस बिल के माध्यम से केंद्र सरकार के अधिकारों में अत्यधिक वृद्धि की जा रही है। नए केंद्रीय निकायों के गठन और नियम बनाने की शक्तियों के विस्तार से राज्यों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और राज्यों के लिए अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार बिजली नीति, सब्सिडी और टैरिफ तय करना कठिन हो जाएगा।संघर्ष समिति ने कहा कि इस बिल से सार्वजनिक वितरण कंपनियाँ आर्थिक रूप से कमजोर होंगी, किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ बढ़ेगा तथा मुनाफे का निजीकरण और घाटे का सामाजिककरण होगा।संघर्ष समिति ने सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से अपील की है कि वे इस बिल के गंभीर परिणामों पर विचार करें और संसद में इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 का मजबूती से विरोध करें, ताकि किसानों, उपभोक्ताओं, बिजली कर्मचारियों और देश की संघीय व्यवस्था के हितों की रक्षा हो सके। संघर्ष समिति ने दोहराया कि बिजली एक आवश्यक सार्वजनिक सेवा है और यह सभी नागरिकों को सस्ती, सुलभ और विश्वसनीय रूप से उपलब्ध रहनी चाहिए। संघर्ष समिति ने इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 को तत्काल वापस लेने तथा बिजली क्षेत्र में किसी भी सुधार से पहले राज्य सरकारों, बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों, किसान संगठनों और उपभोक्ता संगठनों से सार्थक परामर्श करने की मांग की। सभा में मुख्य रूप से इंजीनियर रामसनेही, इंजीनियर पीके तिवारी, इंजीनियर धीरैश गुप्ता, इंजीनियर सत्यमत्रिपाठी, इंजीनियर तपस प्रसाद, इंजीनियर शहेंद्र कुमार, इंजीनियर प्रिंस कुमार, निर्भय नारायण सिंह, राघवेंद्र यादव, वीरेंद्र यादव, अनमोल मिश्रा, अनुराग शर्मा, प्रवीण पांडे, राम लखनयादव, महेंद्र राम, सिकंदर रजा, सुजीत यादव, वेदांत त्रिपाठी, सहस्त्रजीत यादव, मुकेश कुमार, अशोक यादव, राकेश कुशवाहा, भानु कुशवाहा, प्रवीण सिंह, प्रमोद कुमार, अवधेश यादव, अरुण चौरसिया, मोहम्मद इकराम, विशाल कुमार सहित तमाम विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभा की अध्यक्षता धर्मेंद्र श्रीवास्तव एवं संचालन अजय विश्वकर्मा ने किया।

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