लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर एवं विज्ञान भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश द्वारा संयुक्त रूप से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश तथा जुपिटर इंजीनियरिंग वर्क्स, नई दिल्ली के सहयोग से दिनांक 12 एवं 13 मार्च 2026 को आयोजित किए जा रहे “एडवांस्ड डिज़ाइन, मैन्युफैक्चरिंग एंड सस्टेनेबल एनर्जी सिस्टम्स” विषयक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन आज विश्वविद्यालय के अटल भवन सभागार में हुआ। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में प्रो समशेर, माननीय कुलपति, हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी, कानपुर मौजूद रहे जबकि कार्यवाहक कुलपति प्रो वी के गिरी ने उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि सहित अन्य मंचासीन अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन तथा वाग्देवी एवं पंडित मालवीय के चित्र पर माल्यार्पण कर सम्मेलन का शुभारंभ किया।उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. समशेर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के दौर में इंजीनियरिंग अनुसंधान को मात्र सैद्धांतिक या प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे उद्योग की व्यावहारिक आवश्यकताओं, समाज की वास्तविक चुनौतियों तथा सतत विकास (Sustainable Development) के वैश्विक लक्ष्यों से मजबूती से जोड़ना अत्यंत आवश्यक और समय की मांग बन चुका है। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में उन्नत सामग्री (Advanced Materials) के क्षेत्र में हो रहे तेजी से विकास, आधुनिक विनिर्माण तकनीकों (Modern Manufacturing Technologies) जैसे एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री 4.0 से जुड़ी प्रक्रियाओं, तथा ऊर्जा प्रणालियों (Energy Systems) में नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, हाइड्रोजन और स्मार्ट ग्रिड जैसी नवीनतम प्रगति भविष्य की तकनीकी क्रांति को एकदम नई दिशा प्रदान करने वाली साबित होंगी। ये नवाचार न केवल दक्षता बढ़ाएंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे। प्रो. समशेर ने ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों को अत्यंत महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि ये सम्मेलन शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों तथा युवा विद्यार्थियों के लिए एक आदर्श मंच प्रदान करते हैं। यहां न केवल नवीनतम शोध परिणामों का आदान-प्रदान होता है, बल्कि विभिन्न देशों और संस्थानों के बीच वैश्विक स्तर पर सहयोग, नेटवर्किंग और संयुक्त परियोजनाओं की नींव भी पड़ती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसी प्रकार के मंच ही नवाचार को गति देते हैं और समाज के लिए उपयोगी, व्यावहारिक समाधान विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे इस सम्मेलन के दौरान खुले मन से विचार-विमर्श करें, नई साझेदारियां बनाएं और इंजीनियरिंग अनुसंधान को मानव कल्याण तथा सतत भविष्य की दिशा में और अधिक प्रभावी ढंग से योगदान देने योग्य बनाएं।उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कार्यवाहक कुलपति प्रो वी के गिरी ने कहा कि आधुनिक इंजीनियरिंग शिक्षा और अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख स्तंभ— उन्नत डिजाइन, उन्नत निर्माण प्रक्रिया, तथा सस्टेनेबल ऊर्जा प्रणालियां, अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में समन्वित शोध और नवाचार भविष्य की टिकाऊ तकनीकी प्रणालियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।विभागाध्यक्ष प्रो संजय मिश्र ने सम्मेलन की भूमिका पर प्रकाश डाला जबकि आयोजन सचिव डॉ पल्लव गुप्ता तथा डॉ वीरेंद्र कुमार ने क्रमशः सम्मेलन की रूपरेखा और इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उद्घाटन सत्र के बाद विभिन्न तकनीकी सत्र आरम्भ हुए। पहले आमंत्रित व्याख्यान में आई आई टी दिल्ली के प्रो पुलक मोहन पांडेय ने कहा कि 3D (थ्री डी) एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग आधुनिक निर्माण तकनीकों में तेजी से उभरती हुई तकनीक है, जिसमें सामग्री को परत-दर-परत जोड़कर जटिल संरचनाओं का निर्माण किया जाता है। उन्होंने इसके सिद्धांतों, कार्यप्रणाली और औद्योगिक उपयोगों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भविष्य में यह तकनीक उद्योग, चिकित्सा तथा एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।दूसरे आमंत्रित व्याख्यान में आई आई टी खड़गपुर की प्रो ज्योत्सना दत्ता मजूमदार ने कहा कि मैग्नीशियम तथा उसके मिश्रधातु जैव-इम्प्लांट के लिए अत्यंत संभावनाशील सामग्री हैं। उन्होंने बताया कि लेज़र सरफेस इंजीनियरिंग तकनीक के माध्यम से इन सामग्रियों की सतह के गुणों में सुधार कर इम्प्लांट की मजबूती, टिकाऊपन और मानव शरीर के साथ अनुकूलता को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्नत सतह इंजीनियरिंग तकनीकें चिकित्सा विनिर्माण और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नए अवसर प्रदान कर रही हैं।तीसरे आमंत्रित व्याख्यान में आई आई टी कानपुर के प्रो शक्ति एस गुप्ता ने कहा कि क्वाड्रुपेड (चार पैरों वाले) रोबोट के विकास के लिए सिस्टम इंजीनियरिंग दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि ऐसे रोबोट के निर्माण में मैकेनिकल डिजाइन, संरचनात्मक विन्यास, सेंसर तकनीक और नियंत्रण प्रणाली का समन्वित उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि क्वाड्रुपेड रोबोट असमान और कठिन क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकते हैं, जिससे आपदा प्रबंधन, औद्योगिक निरीक्षण और अन्वेषण जैसे कार्यों में इनकी उपयोगिता बढ़ती है।चौथे आमंत्रित वक्ता प्रो आर के वर्मा, एच बी टी यू, कानपुर ने बताया कि नैनोमैटेरियल युक्त संरचनात्मक कंपोज़िट पदार्थ भविष्य के टिकाऊ इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इनके निर्माण तथा मशीनिंग से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इन उन्नत सामग्रियों के उपयोग से संरचनाओं की मजबूती, हल्कापन तथा कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।पांचवीं आमंत्रित वक्ता प्रो ओफेलिया अराउजो, रियो फेडरल यूनिवर्सिटी, ब्राजील ने कहा कि विश्व ऊर्जा प्रणाली तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है और जीवाश्म ईंधनों से हटकर सौर, पवन तथा जलविद्युत जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह ऊर्जा परिवर्तन कार्बन उत्सर्जन को कम करने, पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने तथा समाज को विश्वसनीय और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न संस्थानों के लगभग 50 शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए ऊर्जा, उन्नत सामग्री, सतत विनिर्माण तथा रोबोटिक्स से जुड़े अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि तकनीकी नवाचार और अंतरविषयी सहयोग के माध्यम से ही सतत विकास के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।
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