लखनऊ। किफायती रोबोटिक्स तथा स्वदेशी तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर को “System and Method for Low-Cost Motor Control Using Arduino for Lightweight Robotic Arm Applications” शीर्षक आविष्कार के लिए भारतीय पेटेंट प्रदान किया गया है। यह पेटेंटेड तकनीक विश्वविद्यालय के विद्युत अभियंत्रण विभाग के प्रो. अशोक कुमार पाण्डेय, विश्वविद्यालय के शोधार्थी गौरव कुमार मिश्रा तथा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), जमशेदपुर के डॉ. ओम हरि गुप्ता द्वारा विकसित की गई है।यह नवाचार एक किफायती मोटर नियंत्रण प्लेटफॉर्म प्रस्तुत करता है, जो ओपन-सोर्स आर्डयूनो (Arduino) इकोसिस्टम का उपयोग करते हुए डी सी मोटर, सर्वो मोटर तथा स्टेपर मोटर की गति, दिशा और स्थिति का प्रभावी नियंत्रण करने में सक्षम है। इस प्रणाली में माइक्रोकंट्रोलर के साथ मोटर ड्राइवर, कीपैड, इन्फ्रारेड रिमोट कंट्रोल, अल्ट्रासोनिक सेंसर तथा रोटरी एन्कोडर जैसे फीडबैक एवं नियंत्रण उपकरणों का एकीकृत उपयोग किया गया है।इस आविष्कार की प्रमुख विशेषता इसका तीन स्वतंत्र गतियों वाले हल्के रोबोटिक आर्म के साथ एकीकरण है। एल्यूमिनियम एवं ए बी एस सामग्री से निर्मित यह रोबोटिक आर्म 2 किलोग्राम से कम वजन का है तथा लगभग 0.5 किलोग्राम तक भार वहन करने में सक्षम है।यह तकनीक अभियंत्रण शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में मोटर नियंत्रण प्रयोगों और रोबोटिक्स प्रशिक्षण की उच्च लागत जैसी प्रमुख चुनौती का समाधान प्रस्तुत करती है। वर्तमान में ओपल आर टी एवं एफ पी जी ए आधारित रीयल-टाइम नियंत्रण प्रणालियों की लागत सामान्यतः 20 लाख रुपये से अधिक होती है, जबकि विकसित Arduino आधारित प्रणाली को लगभग 10,000 रुपये की लागत में तैयार किया जा सकता है। इसी प्रकार, बाजार में उपलब्ध रोबोटिक आर्म की कीमत सामान्यतः 1 लाख रुपये से अधिक होती है, जबकि इस परियोजना के अंतर्गत विकसित हल्के रोबोटिक आर्म का निर्माण लगभग 15,000 रुपये की लागत में किया जा सकता है।आविष्कारकों के अनुसार, इस तकनीक का कठोर गणितीय मॉडलिंग, सिमुलेशन अध्ययन तथा हार्डवेयर परीक्षणों के माध्यम से सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया है। परीक्षणों में मोटरों की सटीक गति नियंत्रण, विश्वसनीय स्थिति नियंत्रण तथा रोबोटिक आर्म के समन्वित संचालन का सफल प्रदर्शन किया गया।यह पेटेंटेड प्रणाली अभियंत्रण महाविद्यालयों, पॉलीटेक्निक संस्थानों, कौशल विकास केंद्रों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं, रोबोटिक्स प्रशिक्षण संस्थानों तथा लघु उद्योगों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। यह रोबोटिक्स शिक्षा एवं प्रयोगात्मक अनुसंधान हेतु एक किफायती एवं व्यावहारिक मंच उपलब्ध कराएगी।यह नवाचार तकनीकी विकास में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने तथा किफायती रोबोटिक्स एवं अनुप्रयुक्त अभियंत्रण शिक्षा के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को सुदृढ़ करने की राष्ट्रीय दृष्टि के अनुरूप है। आविष्कारकों का मानना है कि यह तकनीक देशभर में उन्नत रोबोटिक्स प्रशिक्षण एवं अनुसंधान अवसंरचना तक व्यापक और लोकतांत्रिक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने पेटेंट प्राप्त करने पर शोध दल को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में नवाचार, बौद्धिक संपदा सृजन तथा समाजोपयोगी अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने टीम के समर्पण, शोध उत्कृष्टता एवं तकनीकी नवाचार के प्रति उनके योगदान की सराहना की।
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