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गाजीपुर के मोस्‍ट बैकवर्ड की राजनीति में हासिये पर जा रहा है कुशवाहा समाज

शिवकुमार

गाजीपुर। जनपद के सात विधानसभाओं में लगभग 26 लाख मतदाता हैं, जिनमे अति पिछड़ी जातियों का राजनीति में महत्‍वपूर्ण रोल है। वह किसी को भी जीरो से हीरो बना सकती है और हीरो से जीरो पर ला सकती है। यादव को छोड़कर अति पिछड़े जातियों में कुशवाहा, राजभर, बिंद और चौहान का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। कुशवाहा समाज शैक्षिक और आर्थिक रुप से मजबूत होने के बावजूद भी जिले की राजनीति में लगातार हासिए पर जा रही है। वहीं राजभर समाज और बिंद समाज लगातार राजनैतिक पटल पर अपना पताका फहरा रही है। सन् 2002 से लेकर 2024 तक विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में विभिन्‍न दलों ने कुशवाहा समाज को पांच-छह मौके दिए जिसमे से केवल उमाशंकर कुशवाहा और जयराम कुशवाहा बसपा से विधायक बन सके बाकी कुशवाहा उम्‍मीदवार ने सफलता प्राप्‍त नही किया। वहीं राजभर समाज से कालीचरण राजभर दो बार, ओमप्रकाश राजभर दो बार विधायक बनने में सफलता प्राप्‍त किया। डा. संगीता बलवंत एक बार विधायक बनीं और दूसरी बार पराजित हो गयीं। वर्तमान में वह राज्‍यसभा सांसद हैं। इस संदर्भ में समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय सचिव राजेश कुशवाहा ने बताया कि कुशवाहा समाज के राजनीतिक रूप से कमजोर होने का कोई एक नहीं बल्कि अनेकों कारण है। जो प्रमुख कारण है वह यह है कि हमारा सामाजिक बिखराव ज्यादा है। बड़ी आबादी के रूप में होने के बाद भी हमारे पास मजबूत और प्रभावशाली सामाजिक संगठन नहीं है। राजनीतिक जागरूकता भी हमारे समाज के अंदर कम है और वह इसलिए कम है क्योंकि हम अपने कृषि व अन्य कार्यों से संतुष्ट होने के कारण आत्मनिर्भर ज्यादा है। राजनीतिक महत्व को कम समझते हैं अन्य जातियों की तरह कुशवाहा समाज उपेक्षित नहीं है,हम लोग सुविधा भोगी हो चुके हैं, हमारे घर की महिलाएं तो दूर पुरुष घर से बाहर नहीं निकलता है, अपने परिवार में बहुत कम राजनीतिक रूप से चर्चा करते हैं और विशेष रूप से सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक रूप से हम अपने को अन्य जातियों की तुलना में सुरक्षित समझते हैं। किसी भी प्रकार के चुनाव में हमारी भागीदारी बहुत कम होती है हम इसके महत्व को नहीं समझते है। हम आपस में लड़कर दूसरे को शासक बना देते हैं लेकिन स्वयं शासक नहीं बन पाते हैं।हमारा समाज कमजोर नहीं है बस हमारे अंदर सही सोच की कमी है। जहां अभाव व असुरक्षा की भावना ज्यादा होता है वहीं समाज या व्यक्ति संगठन के महत्व समझता है उसको प्राप्त करने के लिए संघर्ष करता है। पूर्व विधायक उमाशंकर कुशवाहा ने बताया कि राजनैतिक दल के उपेक्षाओं के चलते कुशवाहा समाज राजनीतिक पटल पर उपेक्षित है। लेकिन जब-जब कुशवाहा को मौका मिला है तब-तब पूरे समाज ने बढ़-चढ़कर मतदान किया है और हर संभव मदद भी किया है। कुछ वजह से अभी समीकरण नही बैठ पा रहे हैं जिसके वजह से कुशवाहा के प्रत्‍या‍शियों को सफलता नही मिल पा रही है। भाजपा के जिला उपाध्‍यक्ष सुधाकर कुशवाहा ने बताया कि मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ कि गाजीपुर में किसी समाज को जानबूझकर हाशिये पर रखा गया है। भारतीय जनता पार्टी ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के सिद्धांत पर काम करती है। गाजीपुर और प्रदेश संगठन में कुशवाहा समाज के साथ-साथ मौर्य, शाक्य, सैनी सहित सभी समाजों के प्रतिनिधियों को संगठन और सरकार में विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियाँ मिली हैं। 1 प्रदेश महामंत्री, 3 प्रदेश उपाध्यक्ष ,1 महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष, जिला उपाध्यक्ष, जिला मंत्री सहित राज्य सभा, विधान परिषद एवं मंत्रिमंडल में उचित स्थान दिया है। संगठन में स्थान केवल जाति के आधार पर नहीं, बल्कि कार्यकर्ता की सक्रियता, क्षमता और संगठन के प्रति समर्पण को ध्यान में रखकर दिया जाता है। यदि किसी समाज के लोगों को किसी प्रकार की समस्या या अपेक्षा है, तो पार्टी के दरवाजे हमेशा खुले हैं। हम उनकी बात सुनते हैं और सकारात्मक समाधान का प्रयास करते हैं। हमारा उद्देश्य किसी एक समाज को नहीं, बल्कि पूरे गाजीपुर के विकास और प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए काम करना है। जमानियां ब्‍लाक के ब्‍लाक प्रमुख प्रतिनिधि व ग्राम प्रधान संतोष कुशवाहा ने बताया कि जागरुकता के अभाव में समाज में राजनीतिक चेतना पूरी तरह से नही है लेकिन अब सम्राट अशोक क्‍लब के तत्‍वावधान में पूरे समाज को जागरुक किया जा रहा है। जल्‍द ही कुशवाहा समाज राजनीतिक पटल पर अपना पताका फहरायेगी।

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