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राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की अकादमिक परिषद् के सदस्य बने एमएमएमयूटी के प्रो. गोविंद पांडेय

गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. गोविंद पांडेय को भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत गठित अकादमिक परिषद् का सदस्य नामित किया गया है। इस परिषद का गठन राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत तैयार किए गए प्रशिक्षकीय सामग्री की गुणवत्ता की समीक्षा एवं सुनश्चयन सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा निर्गत आदेश के अनुसार, अकादमिक परिषद् में नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, शिक्षण संस्थानों तथा उद्योग जगत के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। प्रो. गोविंद पांडेय को इस परिषद् में शिक्षण संस्थान के प्रतिनिधि के रूप में नामित किया गया है।अकादमिक परिषद् ग्रीन हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी से जुड़े गुणवत्ता मानक और बेंचमार्क तय करेगी, उन्हें अधिक प्रभावी तथा उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए सुझाव देगी, लागत निर्धारण का एक समान ढांचा विकसित करेगी तथा राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत कौशल विकास को और सुदृढ़ बनाने के लिए समय-समय पर सरकार को अनुशंसाएं भी उपलब्ध कराएगी।इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने प्रो. गोविंद पांडेय को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय निकाय में उनका नामांकन एमएमएमयूटी की बढ़ती शैक्षणिक उत्कृष्टता और तकनीकी विशेषज्ञता का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रो. पांडेय का अनुभव देश में उभरते ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा तथा इससे विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा और मजबूत होगी।प्रो. गोविंद पांडेय एमएमएमयूटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में पर्यावरण इंजीनियरिंग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से बी.टेक., एमएमएमईसी, गोरखपुर से एम.टेक. तथा आईआईटी रुड़की से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। वर्ष 1991 से एमएमएमयूटी में कार्यरत रहे प्रो. पांडेय के निर्देशन में 157 से अधिक एम.टेक. तथा तीन पीएच.डी. शोधार्थियों ने शोध कार्य पूरा किया है। उनके 143 से अधिक शोधपत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं तथा सम्मेलनों में प्रकाशित हो चुके हैं। वे राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, गोंडा के निदेशक तथा एनआईटी कालीकट के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य भी रह चुके हैं।

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