वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में वाराणसी के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए लाइव वैज्ञानिक प्रयोगों पर आधारित एक रोचक साइंस शो का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना तथा सहभागिता-आधारित एवं प्रयोग-आधारित गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान के प्रति जिज्ञासा को प्रोत्साहित करना था। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि विज्ञान केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे दैनिक जीवन में उसके व्यावहारिक उपयोगों के माध्यम से समझना आवश्यक है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल, रोचक और सहज बनाते हैं तथा उनमें जिज्ञासा, प्रयोगधर्मिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कुलपति ने हाल ही में भारतीय विद्यार्थियों की एक उल्लेखनीय उपलब्धि का उल्लेख करते हुए बताया कि 12 से 18 जुलाई, 2026 के दौरान कोलंबिया में आयोजित 55वें अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड में भारतीय टीम के सभी पाँच प्रतिभागियों ने स्वर्ण पदक प्राप्त किए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने, वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने तथा भविष्य में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने का लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में वाराणसी के विद्यालयों के विद्यार्थी भी ऐसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भाग लेकर देश का नाम रोशन करेंगे।कार्यक्रम में विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए भौतिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजेंद्र कुमार ने कहा कि बच्चों में स्वाभाविक रूप से जिज्ञासा और सृजनात्मकता होती है, जिसे उचित मार्गदर्शन और अनुकूल वातावरण के माध्यम से नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने अनुभवात्मक शिक्षण की उपयोगिता बताते हुए विद्यार्थियों से विज्ञान को केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि अवलोकन और प्रयोगों के माध्यम से सीखने का आह्वान किया। उन्होंने विभाग द्वारा संचालित आउटरीच कार्यक्रमों की जानकारी भी दी, जिनके अंतर्गत विद्यालयों के विद्यार्थी नियमित रूप से भौतिकी विभाग की प्रयोगशालाओं का भ्रमण कर वैज्ञानिक प्रयोगों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करते हैं।विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. संजय कुमार ने कहा कि सच्ची या प्रभावी शिक्षा वह होती है जो किसी विषय को जानने की इच्छा और उसमें रुचि के कारण प्राप्त की जाए, न कि केवल इसलिए कि उसे पढ़ना या सीखना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इस साइंस शो का उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित करना है। उन्होंने विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक करियर संभावनाओं का उल्लेख करते हुए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार का संदर्भ दिया तथा बीएचयू की समृद्ध वैज्ञानिक परंपरा को रेखांकित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के कार्यक्रम अधिकाधिक विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में उत्साहपूर्वक आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान (आईईएसडी) के निदेशक प्रो. ए. एस. रघुवंशी ने विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग और चिकित्सा के अतिरिक्त विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्ध विविध करियर अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी रुचि के अनुरूप करियर का चयन करने का आग्रह करते हुए आशा व्यक्त की कि इस प्रकार की पहल युवा विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और आत्मविश्वास को बढ़ावा देगी।प्रबन्ध शास्त्र संस्थान के निदेशक प्रो. आशीष बाजपेयी ने विद्यार्थियों से इस अनुभव को अपनी सीखने की यात्रा का स्थायी हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में आयोजक संस्था आईआरओ वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक मनोहर कुमार ने अनेक रोचक लाइव वैज्ञानिक प्रयोगों का सजीव प्रदर्शन किया। उन्होंने विज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों को सरल एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया तथा अवलोकन, प्रयोग और तार्किक चिंतन के माध्यम से विज्ञान को समझने का अवसर प्रदान किया।

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