वाराणसी। अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट में बुधवार को श्रद्धा एवं आस्था के साथ गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संत कबीरदास एवं संत रविदास के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए गुरुओं के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डायरेक्टर अशोका डॉ. सारिका श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। शिक्षा का क्षेत्र हो या आध्यात्मिक साधना, दोनों ही मार्गों पर गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति को सही दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान का संचार नहीं करते, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और जीवन मूल्यों की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डीन एकेडमिक डॉ. एस.के. शर्मा ने कहा कि वाराणसी सदियों से आध्यात्मिक एवं ज्ञान की नगरी रही है। यहां अनेक महान संतों और गुरुओं ने राजसत्ता के मोह से दूर रहकर समाज को नई दिशा, जीवन दर्शन और मानवता का संदेश दिया। उनके विचार आज भी समाज को सत्य, करुणा और सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम में डॉ. आदित्य सिंह यादव ने गुरु महिमा पर आधारित ओजपूर्ण कविता का पाठ कर उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन सारांश एवं वाघमी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पल्लवी सिंह ने प्रस्तुत किया।
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