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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में उत्साहपूर्वक मनाया गया विश्व हेपेटाइटिस दिवस–2026

वाराणसी। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर आज चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित सर सुन्दरलाल चिकित्सालय के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के अंतर्गत संचालित मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर (MTC) द्वारा नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम (NVHCP) के अंतर्गत व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन विभाग के समिति कक्ष, शताब्दी सुपर स्पेशियलिटी भवन में किया गया, जिसमें चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों, स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों एवं उनके परिजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारम्भ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं NVHCP के नोडल अधिकारी डॉ. देवेश प्रकाश यादव के अध्यक्षीय उद्बोधन से हुआ।

मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर की उपलब्धियाँ

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के अंतर्गत संचालित मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर 14 सितम्बर 2020 से निरंतर राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत है। यह केन्द्र पूर्वांचल एवं आसपास के जिलों के मरीजों को निःशुल्क पंजीकरण, विशेषज्ञ परामर्श, उपचार, फॉलो-अप एवं राष्ट्रीय गाइडलाइन के अनुरूप समग्र सेवाएँ उपलब्ध करा रहा है।

हेपेटाइटिस-बी (HBV) पंजीकृत मरीज

– 2020 (14 सितम्बर–31 दिसम्बर) – 412

– 2021 – 1,623

– 2022 – 1,070

– 2023 – 1,006

– 2024 – 1,232

– 2025 – 2,220

– 2026 (27 जुलाई तक) – 851

कुल पंजीकृत हेपेटाइटिस-बी मरीज : 8,414

हेपेटाइटिस-सी (HCV) पंजीकृत मरीज

– 2020 (14 सितम्बर–31 दिसम्बर) – 45

– 2021 – 314

– 2022 – 468

– 2023 – 437

– 2024 – 439

– 2025 – 716

– 2026 (27 जुलाई तक) – 289

कुल पंजीकृत हेपेटाइटिस-सी मरीज : 2,708

अब तक मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर द्वारा 11,122 से अधिक वायरल हेपेटाइटिस मरीजों का पंजीकरण कर उन्हें राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत उपचार एवं नियमित फॉलो-अप की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं NVHCP के नोडल अधिकारी डॉ. देवेश प्रकाश यादव ने कहा कि वायरल हेपेटाइटिस एक “साइलेंट किलर” है, क्योंकि अधिकांश मरीजों में प्रारम्भिक अवस्था में कोई विशेष लक्षण नहीं दिखाई देते। समय पर जांच एवं उपचार न होने पर यह लिवर सिरोसिस, लिवर फेल्योर तथा लिवर कैंसर जैसी गंभीर एवं जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस-बी का प्रभावी टीका उपलब्ध है तथा हेपेटाइटिस-सी का पूर्ण उपचार संभव है। उन्होंने सभी नागरिकों से समय पर जांच कराने, टीकाकरण कराने तथा वर्ष 2030 तक “हेपेटाइटिस मुक्त भारत” के लक्ष्य को सफल बनाने में सहयोग देने की अपील की। सह आचार्य डॉ. एस. के. शुक्ला ने कहा कि हेपेटाइटिस की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता है। प्रत्येक गर्भवती महिला की आवश्यक जांच, प्रत्येक नवजात को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी का टीका तथा सुरक्षित चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन संक्रमण रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लक्षण दिखाई देने की प्रतीक्षा न करें, बल्कि जोखिम होने पर समय पर जांच अवश्य कराएं। सहायक आचार्य डॉ. अनुराग कुमार तिवारी ने कहा कि हेपेटाइटिस-बी एवं हेपेटाइटिस-सी का समय पर उपचार मरीज को सामान्य एवं स्वस्थ जीवन प्रदान कर सकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रभावी दवाओं एवं राष्ट्रीय कार्यक्रम के माध्यम से हजारों मरीज लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने तथा वैज्ञानिक जानकारी को अपनाने का आह्वान किया। सहायक आचार्य डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित रक्त, स्टेराइल सुई, व्यक्तिगत स्वच्छता तथा सुरक्षित जीवनशैली अपनानी चाहिए। संक्रमित व्यक्ति भी नियमित उपचार एवं चिकित्सकीय सलाह का पालन करके स्वस्थ एवं सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना चिकित्सकीय सलाह के उपचार न लें तथा नियमित फॉलो-अप अवश्य कराएं। मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर के चिकित्सा अधिकारी डॉ. ब्रजेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि केन्द्र पर हेपेटाइटिस-बी एवं हेपेटाइटिस-सी के मरीजों का पंजीकरण, उपचार, नियमित फॉलो-अप एवं परामर्श राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत निरंतर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, नियमित दवा एवं चिकित्सकीय परामर्श का पालन करने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से आवश्यकता होने पर जांच कराने एवं पात्र मरीजों को राष्ट्रीय कार्यक्रम से जुड़ने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान मरीजों एवं उनके परिजनों को वायरल हेपेटाइटिस के कारण, लक्षण, बचाव, टीकाकरण, उपचार एवं नियमित फॉलो-अप के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। सभी प्रतिभागियों ने वर्ष 2030 तक “हेपेटाइटिस मुक्त भारत” के लक्ष्य को साकार करने हेतु जन-जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर विभाग के डॉ. देवेश प्रकाश यादव, डॉ. एस. के. शुक्ला, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. अनुराग कुमार तिवारी, डॉ. उमेश कुमार तिवारी, डॉ. ब्रजेश कुमार पाण्डेय सहित विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

 

 

 

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