लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के योग विभाग, फैकल्टी ऑफ योग एवं ऑल्टरनेटिव मेडिसिन के तत्वाधान में, लखनऊ विश्वविद्यालय के 69वें दीक्षांत समारोह के कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत लखनऊ विश्वविद्यालय के गौरव स्थल पर “योग एक विरासत” नामक कार्यक्रम में पारंपरिक योग अभ्यास शिविर का आयोजन प्रातः काल 5:30 बजे किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में योग विभाग के कॉर्डिनेटर डॉ. अमरजीत यादव ने प्रातः काल योगाभ्यास करने के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रातःकाल , विशेषकर सूर्योदय से पहले या सूर्योदय के समय योगाभ्यास करने का सर्वोत्तम समय माना जाता है। इस समय वातावरण शांत, स्वच्छ और प्रदूषण रहित होता है, जिससे योगाभ्यास का अधिकतम लाभ प्राप्त होता है। सुबह की शुद्ध एवं ताजी हवा में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है, जो हृदय एवं फेफड़ों के लिए लाभकारी होती है। इस समय योगाभ्यास से श्वसन तंत्र की कार्यक्षमता बढ़ती है तथा हृदय स्वस्थ रहता है। साथ ही शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है, जिससे शरीर के सभी अंग स्वस्थ रहते हैं। इससे पाचन तंत्र भी सक्रिय होता है जिससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है। सुबह की हल्की धूप से शरीर को विटामिन D मिलता है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और बीमारियों से बचाव होता है। प्रातः काल खुले, स्वच्छ, शांत एवं प्राकृतिक वातावरण में योगाभ्यास का सकारात्मक प्रभाव मन को आनंद और शांति प्रदान करता है। तनाव, चिंता और अवसाद कम होते हैं जिससे एकाग्रता एवं स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है और मस्तिष्क अधिक सक्रिय रहता है। छात्रों के लिए प्रातः काल का योगाभ्यास और भी महत्व रखता है, क्योंकि इससे उनके पढ़ाई और कार्य में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है। खुले वातावरण में ध्यान और योगाभ्यास अधिक प्रभावी होता है। अंतः स्रावी ग्रंथियाँ बेहतर कार्य करती हैं। शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है। प्रातः काल के नियमित योगाभ्यास द्वारा शरीर में ऊर्जा का संचार बेहतर होता है तथा शरीर में स्फूर्ति और ताजगी बनी रहती है। उन्होंने प्रातः काल की खुली हवा में योगाभ्यास के लाभ बताते हुए प्रतिभागियों को प्रतिदिन सुबह आसन, प्राणायाम और ध्यान के अभ्यास के लिए प्रेरित किया। इसी कार्यक्रम श्रृंखला में योग विभाग के सभागार में “योग संगम” नामक सेमिनार का भी आयोजन किया गया। सेमिनार के मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर आर. के. सिंह – पूर्वकुलपति एस. बी. एस. विश्वविद्यालय देहरादून, उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास व्यक्ति की दिनचर्या को संतुलित एवं अनुशासित बनाता है। जिससे जीवनशैली संबंधी विकारों की रोकथाम में सहायता मिलती है। साथ ही जीवन में धैर्य, एकाग्रता, आत्मनियंत्रण और नैतिक मूल्यों का विकास भी होता है। प्रोफेसर आलोक कुमार यादव – डीन योग विभाग, ने छात्रों एवं प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि योग हमें स्वयं से जुड़ना सिखाता है। आप सभी छात्र एवं प्रतिभागी योग के सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाकर स्वस्थ जीवनशैली, बेहतर व्यक्तित्व और सकारात्मक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस अवसर पर योग विभाग के शिक्षक, छात्र – छात्राएं और योग विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
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