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एमएमएमयूटी में शिक्षकों को मिलेगा 50 हजार रुपये का सीड मनी, शोधार्थियों को 20 हजार रुपये वार्षिक कॉन्टिंजेंसी ग्रांट

लखनऊ। शोध एवं नवाचार को नई गति देने की दिशा में मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय ने शिक्षकों को 50 हजार रुपये की सीड मनी तथा विश्वविद्यालय फेलोशिप श्रेणी में प्रवेश लेने वाले शोधार्थियों को 20 हजार रुपये की वार्षिक कॉन्टिंजेंसी ग्रांट देने का निर्णय लिया है। इन पहलों का उद्देश्य शोधकर्ताओं को उनके शोध करियर के शुरुआती चरण में मजबूत संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराना है। शिक्षकों को सीड मनी देने के प्रस्ताव को वित्त समिति की मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे आगामी बैठक में अनुमोदन के लिए विश्वविद्यालय की प्रबंध बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा। प्रस्तावित सीड मनी योजना के तहत नियमित एवं संविदा दोनों श्रेणियों के सहायक आचार्य और सह आचार्य विश्वविद्यालय के आंतरिक संसाधनों से 50 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकेंगे। यह राशि दो चरणों में जारी की जाएगी। पहले चरण में स्वीकृत राशि का 60 प्रतिशत दिया जाएगा। शेष 40 प्रतिशत राशि शोध कार्य की प्रगति और प्रारंभिक अनुदान के उपयोग के मूल्यांकन के बाद जारी की जाएगी। सीड मनी से नव नियुक्त शिक्षकों को शोध परियोजनाएं शुरू करने, प्रारंभिक अध्ययन एवं प्रयोग करने, शोध के लिए प्रारंभिक आंकड़े जुटाने तथा बड़े बाहरी वित्त पोषण वाली परियोजनाओं के लिए प्रस्ताव तैयार करने में मदद मिलेगी। इससे शिक्षकों को अपने शोध करियर के शुरुआती दौर में बाहरी अनुदान की प्रतीक्षा किए बिना शोध गतिविधियां शुरू करने का अवसर मिलेगा। इसी क्रम में विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय फेलोशिप श्रेणी में प्रवेश लेने वाले शोधार्थियों को 20 हजार रुपये की वार्षिक कॉन्टिन्जेंसी ग्रांट देने का भी निर्णय लिया है। यह सुविधा फेलोशिप के पहले तीन वर्षों तक उपलब्ध होगी। चौथे वर्ष में भी इसका विस्तार किया जा सकेगा, बशर्ते शोधार्थी निर्धारित शोध उपलब्धि मानदंड पूरा करता हो। इसके लिए शोधार्थी का कम से कम एक शोध-पत्र एससीआई (SCI) में लिस्टेड जर्नल में प्रकाशित होना आवश्यक होगा। आकस्मिक अनुदान से शोधार्थियों के शोध से जुड़े विभिन्न खर्चों को पूरा करने और उनकी अकादमिक गतिविधियों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। चौथे वर्ष में अनुदान जारी रखने को शोध-पत्र के प्रकाशन से जोड़ने का उद्देश्य शोधार्थियों को केवल डिग्री पूरी करने के बजाय गुणवत्तापूर्ण शोध और उच्च स्तरीय प्रकाशनों पर अधिक ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करना है। विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि “दोनों पहल एमएमएमयूटी में शोध के वातावरण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इनसे शोध के दो महत्वपूर्ण चरणों—शिक्षक के शोध करियर की शुरुआत और शोधार्थियों के गहन शोध चरण—में संस्थागत सहयोग सुनिश्चित होगा। सीड मनी से शिक्षक प्रारंभिक शोध परिणाम विकसित कर सकेंगे और बड़े बाहरी शोध अनुदान प्राप्त करने की संभावनाएं बढ़ा सकेंगे, वहीं आकस्मिक अनुदान से शोधार्थियों को शोध संबंधी गतिविधियों और गुणवत्तापूर्ण प्रकाशनों के लिए अधिक सुविधा मिलेगी।” विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि इन पहलों से गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशनों, बाहरी वित्त पोषित परियोजनाओं, पेटेंट, शोध सहयोग और तकनीक आधारित समाधानों में वृद्धि होगी। विश्वविद्यालय का मानना है कि इस प्रकार का सतत संस्थागत सहयोग एमएमएमयूटी में मजबूत शोध संस्कृति विकसित करने के साथ-साथ क्षेत्र में शोध एवं नवाचार के अग्रणी संस्थान के रूप में उसकी स्थिति को और सुदृढ़ करेगा।

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