लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर अपने 11वें दीक्षांत समारोह में स्थानीय कला, सामाजिक सरोकार और विद्यार्थियों की रचनात्मकता का अनूठा संगम प्रस्तुत करने जा रहा है। विश्वविद्यालय ने एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के अंतर्गत चयनित औरंगाबाद गांव के टेराकोटा कारीगरों के साथ मिलकर हस्तनिर्मित टेराकोटा प्लांटर तैयार कराए हैं, जिन्हें दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथियों को स्वागत-उपहार के रूप में भेंट किया जाएगा। इस पहल के अंतर्गत विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की एक टीम ने ओडीओपी योजना के अंतर्गत चयनित औरंगाबाद गांव का भ्रमण किया। टीम ने टेराकोटा कारीगरों से संवाद कर उनके पारंपरिक शिल्प, कार्यप्रणाली तथा आजीविका से जुड़ी चुनौतियों की जानकारी प्राप्त की। विश्वविद्यालय ने कारीगरों को उनके उत्पादों की ब्रांडिंग, बाजार में बेहतर पहचान दिलाने तथा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया, जिससे उनके उत्पादों की गुणवत्ता और विपणन क्षमता को बढ़ाया जा सके। इस सहयोग को मूर्त रूप देने के लिए विश्वविद्यालय ने कारीगरों से विशेष रूप से दीक्षांत समारोह हेतु टेराकोटा प्लांटर तैयार कराए। इसके बाद विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स क्लब के छात्र-छात्राओं ने इन प्लांटरों को कलात्मक स्वरूप देने का दायित्व संभाला। पहले चरण में विश्वविद्यालय में पॉट पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने प्रकृति, भारतीय संस्कृति और समकालीन कला से प्रेरित आकर्षक चित्रों एवं रंगों से टेराकोटा प्लांटरों को सजाया। प्रतियोगिता के दौरान कुल 75 प्लांटरों को विद्यार्थियों ने कलात्मक रूप से सजाया, जिन्हें अब दीक्षांत समारोह में आने वाले विशिष्ट अतिथियों को पर्यावरण-अनुकूल स्वागत-उपहार के रूप में भेंट किया जाएगा। कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि “यह पहल विश्वविद्यालय की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें शिक्षा को कक्षा तक सीमित न रखकर समाज से जोड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनना चाहिए। स्थानीय कारीगरों को विद्यार्थियों से जोड़कर न केवल गोरखपुर की समृद्ध टेराकोटा कला को बढ़ावा दिया जा रहा है, बल्कि नवाचार, मूल्य संवर्धन और सतत आजीविका के अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस पहल से स्थानीय कारीगरों को नए बाजार मिलेंगे और विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित होगी।” यह पहल विश्वविद्यालय की पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के प्रति प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है। पारंपरिक स्मृति-चिह्नों के स्थान पर हस्तनिर्मित एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को अपनाकर विश्वविद्यालय सतत विकास का संदेश दे रहा है। साथ ही, स्थानीय कारीगरों और युवा प्रतिभाओं को एक मंच पर लाकर विश्वविद्यालय ओडीओपी योजना के उद्देश्यों को नवाचार, ब्रांडिंग और व्यापक जन-पहचान के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
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