गाजीपुर। हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में चेहल्लुम पूरी अकीदत से मनाया गया। सादात नगर में एक दिन बाद चेहल्लुम मनाने की परंपरा है। बताते हैं कि प्राचीन काल में नगर का चेहल्लुम जुलूस काफी भव्य होता था, जिसमें हाथी, घोड़ा और ऊंट भी शामिल हुआ करते थे। इस जुलूस को देखने के लिए बाहर के मुसलमान भी काफी संख्या में पहुंचते थे। युवाओं ने जंजीरी मातम कर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। प्रशासन की सतर्कता से आयोजन शांतिपूर्ण रहा। ताजिया और अलम के साथ निकाले गए चेहल्लुम जुलूस में उलेमाओं ने मजलिस के दौरान जिक्र-ए-हुसैन करते हुए कर्बला की शहादत और इंसानियत के संदेश को लोगों तक पहुंचाया। मजलिस में शामिल अकीदतमंदों ने गम-ए-हुसैन मनाते हुए मातम किया। इस दौरान पूरा क्षेत्र “या हुसैन, या हुसैन” की सदाओं से गूंज उठा। मातमी जुलूस में शामिल लोग ताजिया और अलम के साथ नौहा पढ़ते हुए निर्धारित मार्गों से होकर कर्बला पहुंचे, जहां ताजियों को सुपुर्द ए खाक किया गया। चेहल्लुम को लेकर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष तारावती देवी के नेतृत्व में पुलिसकर्मी तैनात रहे। जुलूस के दौरान लोगों के छतों पर खड़े होकर पुलिसकर्मी निगरानी करते नजर आए। प्रशासनिक सतर्कता और आपसी भाईचारे के कारण चेहल्लुम का आयोजन शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
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