Breaking News

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर के दीक्षांत समारोह में 1522 विद्यार्थियों को मिली स्नातक, परास्नातक एवं पीएचडी की उपाधि

लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर का 11 वां दीक्षांत समारोह उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल जी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विकास कौशल मुख्य अतिथि तथा उत्तर प्रदेश सरकार के प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल जी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर कुल 1522 विद्यार्थियों को स्नातक, परास्नातक एवं पीएच.डी. की उपाधियां तथा मुख्य अतिथि को 1 मानद उपाधि प्रदान की गई, जबकि 20 मेधावी विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए कुल 46 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि विकास कौशल को कॉर्पोरेट एवं तकनीकी क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए डॉक्टर ऑफ साइंस (डी.एससी.) की मानद उपाधि प्रदान की गई। समारोह के दौरान अकादमिक तथा संस्थागत योगदान के लिए 07 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर माननीय कुलाधिपति महोदया द्वारा विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा लिखित 13 पुस्तकों, विश्वविद्यालय की वार्षिक छात्र पत्रिका ‘मालविका’, ‘कारविंग्स’, तथा ‘प्रवाह’ एवं विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति आख्या 2025-26 का विमोचन भी किया। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के स्कूली बच्चों द्वारा पर्यावरण एवं देशभक्ति गीत की प्रस्तुति की गयी एवं राज्यपाल द्वारा उन बच्चों चॉकलेट देकर आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर कुलाधिपति द्वारा देवरिया जनपद के आंगनबाड़ी केंद्रों को किट वितरित किया गया तथा देवरिया जनपद के मुख्य विकास अधिकारी एवं पुलिस उपाधीक्षक को 300 HPV वैक्सनैशन कराने हेतु प्रशस्ति पत्र प्रदान किये। समारोह में कुल 1,522 विद्यार्थियों को स्नातक, परास्नातक एवं पी एच डी की उपाधियां निम्नवत प्रदान की गई:

बी.टेक.: 1,065 उपाधियां (845 छात्र, 220 छात्राएं)

बी.बी.ए.: 68 उपाधियां (38 छात्र, 30 छात्राएं)

बी. फार्म: 55 उपाधियां (29 छात्र, 26 छात्राएं)

एम.टेक.: 73 उपाधियां (52 छात्र, 21 छात्राएं)

एम.बी.ए.: 73 उपाधियां (52 छात्र, 21 छात्राएं)

एम.सी.ए.: 75 उपाधियां (52 छात्र, 23 छात्राएं)

एम.एस-सी.: 52 उपाधियां (14 छात्र, 38 छात्राएं)

पीएच.डी.: 61 उपाधियां (37) छात्र, 24 छात्राएं)

इस अवसर पर माननीया कुलाधिपति महोदया द्वारा निम्न विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक वितरित किये गए: –

तान्या दुबे, बी फार्मः कुलपति स्वर्ण पदक, उर्मिला कृष्णदेव शुक्ल स्वर्ण पदक

शशांक मोहन पांडेय, बी टेक सिविल इंजीनियरिंग कुलपति स्वर्ण पदक, स्व. श्री लच्छन राय स्मृति स्वर्ण पदक, आई सी आई अल्ट्राटेक सीमेंट लि. स्वर्ण पदक

आराध्या सिंह, बी टेक कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग: कुलपति स्वर्ण पदक, स्व श्री मुन्नी लाल जैन स्मृति स्वर्ण पदक, श्री रोमेश चन्द्र एवं श्रीमती किशोरी देवी स्वर्ण पदक

हर्ष कुमार मद्धेशिया, बी टेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंगः कुलपति स्वर्ण पदक, स्व श्री गौरी शंकर दास स्मृति स्वर्ण पदक, क्लास ऑफ 1994 स्वर्ण पदक

आशी अवस्थी, बी टेक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंगः कुलपति स्वर्ण पदक, स्व श्रीमती देवकी देवी नांगलिया स्मृति स्वर्ण पदक

श्रेया, बी टेक मैकेनिकल इंजीनियरिंगः कुलपति स्वर्ण पदक, स्व श्री काली चरण कंदोई स्मृति स्वर्ण पदक, स्व श्री जसवंत लाल कालरा एवं स्व श्रीमती जनक कालरा स्वर्ण पदक

स्नेहा जायसवाल, बी टेक केमिकल इंजीनियरिंगः कुलाधिपति स्वर्ण पदक, कुलपति स्वर्ण पदक, स्व श्री हरि प्रसाद गोयनका स्मृति स्वर्ण पदक, स्व श्रीमती लीलावती देवी स्मृति स्वर्ण पदक, आर एस सिंह एम ई 69 स्वर्ण पदक

रुद्र दुबे, बी टेक इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजीः कुलपति स्वर्ण पदक, स्व श्री गणेश प्रसाद शाही स्मृति स्वर्ण पदक

प्रीति गुप्ता, बी बी एः कुलाधिपति स्वर्ण पदक, कुलपति स्वर्ण पदक

अनुष्का सिंह, एम टेक सिविलः कुलपति स्वर्ण पदक

गोविंद कुमार, एम टेक कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंगः कुलपति स्वर्ण पदक, स्व श्री जगन्नाथ सिंह स्मृति स्वर्ण पदक, स्व श्री जनकराज सिंह स्मृति स्वर्ण पदक

संस्कृति, एम टेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंगः कुलपति स्वर्ण पदक

शिवम कुमार, एम टेक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंगः कुलपति स्वर्ण पदक

विक्रम सिंह, एम टेक मैकेनिकल इंजीनियरिंगः कुलपति स्वर्ण पदक, स्व श्री इंद्रासन लाल श्रीवास्तव स्वर्ण पदक, स्व श्री शिव कुमार कंसल स्वर्ण पदक

शालू मिश्रा, एम टेक इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजीः कुलपति स्वर्ण पदक

अनन्या तिवारी, एम बी एः कुलपति स्वर्ण पदक, स्व श्री शिवनाथ सिंह स्मृति स्वर्ण पदक

हर्ष गोयल, एम सी एः कुलपति स्वर्ण पदक, स्व श्री बाबूलाल गोयल स्मृति स्वर्ण पदक

आर्य कुमार सिंह, एम एस सी भौतिकीः कुलपति स्वर्ण पदक, स्व पं. शालिग्राम पांडेय स्मृति स्वर्ण पदक

शाम्भवी, एम एस सी रसायन विज्ञानः कुलाधिपति स्वर्ण पदक, कुलपति स्वर्ण पदक, स्व डॉ हरीशचन्द्र पांडेय स्मृति स्वर्ण पदक

रजनी सिंह, एम एस सी गणितः कुलपति स्वर्ण पदक, स्व श्री कालीचरण काण्डु स्मृति स्वर्ण पदक

इस वर्ष तीनों कुलाधिपति स्वर्ण पदक छात्राओं को मिले (i) चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की सर्वोच्च अंक प्राप्तकर्ता स्नेहा जायसवाल, बी टेक केमिकल इंजीनियरिंग, (ii) तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की सर्वोच्च अंक प्राप्तकर्ता प्रीति गुप्ता, बी बी ए, एवं (iii) परास्नातक पाठ्यक्रमों की सर्वोच्च अंक प्राप्तकर्ता शाम्भवी, एम एस सी केमिस्ट्री | केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की बी टेक छात्रा स्नेहा जायसवाल को सर्वाधिक पाँच (05) स्वर्ण पदक मिले, जिसमें कुलाधिपति स्वर्ण पदक, कुलपति स्वर्ण पदक, स्व श्री हरि प्रसाद गोयनका स्मृति स्वर्ण पदक, स्व श्रीमती लीलावती देवी स्मृति स्वर्ण पदक, आर एस सिंह एम ई 69 स्वर्ण पदक शामिल हैं। 11वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि एवं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री विकास कौशल ने स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधिधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का युग परिवर्तन, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का युग है। ऐसे समय में युवाओं को केवल सफल बनने का नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए सार्थक योगदान देने का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य उन्हीं का है जो जिज्ञासु बने रहें, नई तकनीकों को अपनाएँ और अपने ज्ञान का उपयोग समाज के हित में करें। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रश्न किया कि “दुनिया आपसे यह नहीं पूछेगी कि आपने क्या प्राप्त किया, बल्कि यह पूछेगी कि आपने दुनिया को क्या दिया।” उन्होंने नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता, सार्वजनिक सेवा तथा तकनीकी नेतृत्व को विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बताया। अपने 30 वर्षों के व्यावसायिक अनुभव को साझा करते हुए श्री कौशल ने बताया कि विभिन्न देशों में कार्य करने के दौरान उन्होंने पाँच महत्वपूर्ण जीवन-मूल्य सीखे सीखने की निरंतर जिज्ञासा, सत्यनिष्ठा एवं कार्य नैतिकता, परिवर्तन को अपनाने का साहस, करुणा एवं मानवीय संवेदनाएँ तथा अपनी जड़ों और सहयोग करने वालों के प्रति सदैव कृतज्ञ रहना। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन की सफलता का आकलन केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज पर छोड़े गए सकारात्मक प्रभाव और योगदान से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब युवा वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षक, उद्यमी, इंजीनियर, सिविल सेवक और पेशेवर अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता के साथ नैतिक मूल्यों का पालन करते हुए कार्य करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा- “बड़े सपने देखिए, स्वतंत्र सोचिए, निडर होकर प्रश्न पूछिए, नैतिकता के साथ कार्य कीजिए और मानवता के साथ नेतृत्व कीजिए।” अंत में श्री विकास कौशल ने विश्वविद्यालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होना उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने वर्ष 2026 के सभी उपाधिधारकों को शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे अपने ज्ञान, नवाचार और सेवा-भाव से राष्ट्र को विकसित भारत की दिशा में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँगे। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि संस्कार, सामाजिक उत्तरदायित्व, नवाचार और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण से होगा। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही वर्ष 2047 के विकसित भारत के निर्माता हैं, इसलिए उन्हें ज्ञान के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी आत्मसात करना होगा। कुलाधिपति महोदया ने संयुक्त परिवार व्यवस्था के महत्व पर बल देते हुए कहा कि दादा-दादी और नाना-नानी केवल परिवार के सदस्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और संस्कारों के सबसे बड़े संवाहक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से परिवार के बुजुर्गों के अनुभवों से सीखने तथा पारिवारिक रिश्तों को मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से विवाह के बाद दोनों परिवारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करने तथा सास-बहू एवं दोनों परिवारों के बीच आपसी सम्मान और विश्वास बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। महिलाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज बेटियाँ शिक्षा, खेल, विज्ञान, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में देश का गौरव बढ़ा रही हैं, लेकिन दूसरी ओर दहेज, घरेलू हिंसा, पारिवारिक अपराध और सामाजिक कुरीतियाँ गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों को आत्मनिर्भर, शिक्षित और संस्कारित बनाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है तथा वैवाहिक संबंधों में सम्मान, समानता और सहमति का विशेष महत्व है। राज्यपाल जी ने नशा मुक्ति को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों और युवाओं की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि यदि समाज नशामुक्त होगा तो अनेक पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित होगा। उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने और समाज को जागरूक करने की अपील की। पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने प्लास्टिक के कम उपयोग, जल संरक्षण, अपशिष्ट जल प्रबंधन, सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग तथा स्वच्छ एवं हरित परिसर विकसित करने पर विशेष जोर दिया। राज्यपाल जी ने कहा कि भारत आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। गगनयान मिशन, डिजिटल इंडिया, डिजिलॉकर, खेलों में भारत की बढ़ती उपलब्धियाँ तथा नवाचार आधारित विकास देश की नई पहचान बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र केवल सीमाओं की सुरक्षा से महान नहीं बनता, बल्कि प्रयोगशालाओं में हो रहे शोध, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से भी उसकी शक्ति बढ़ती है। उन्होंने विद्यालयों में गोद लिए गए स्कूलों के माध्यम से प्रतियोगिताओं, प्रेरक गतिविधियों तथा वास्तविक जीवन की प्रेरणादायक कहानियों को बच्चों तक पहुँचाने पर बल देते हुए कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। विश्वविद्यालय के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कुलाधिपति ने आधुनिक प्रयोगशालाओं, समृद्ध पुस्तकालय, गुणवत्तापूर्ण छात्रावास, स्वच्छ पेयजल एवं शौचालय सुविधाओं, छात्र सहभागिता आधारित समितियों तथा नशामुक्त एवं अनुशासित परिसर के निर्माण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की विभिन्न समितियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए, जिससे नेतृत्व क्षमता और उत्तरदायित्व की भावना विकसित हो सके। राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, कौशल और चरित्र के बल पर समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाएं तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

 

 

 

 

Image 1 Image 2

Check Also

जिला सहकारी बैंक गाजीपुर चला रही है कई लाभकारी बैंकिंग योजनाएं- सरोजेश सिंह

गाजीपुर। जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन सरोजेश सिंह ने बताया कि जिला सहकारी बैंक लि0, …