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बायोमेडिकल नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बीएचयू को मिले 6 प्रमुख अनुसंधान अनुदान

वाराणसी। स्वदेशी स्वास्थ्य सेवा अनुसंधान और उच्च शिक्षा उत्कृष्टता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की एनआईआरएफ विशेष अनुदान पहल के तहत छह उच्च-प्रभाव वाली बायोमेडिकल अनुसंधान परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण की मंजूरी हासिल कर ली है। यह परियोजनाएं महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं जिनमें पित्ताशय के कैंसर का प्रारंभित अवस्था में ही पता लगाना, रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) के लिए अगली पीढ़ी के समाधान, पोस्ट-काला-अजार डर्मल लीशमैनियासिस निदान, बाल चिकित्सा सेप्टिक शॉक, और रीनल सेल कार्सिनोमा के लिए सटीक ऑन्कोलॉजी जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण नवाचार का मार्ग प्रशस्त करेंगी। इन परियोजनाओं के लिए स्वीकृत लगभग 15 करोड़ रुपये की कुल अनुदान राशि के माध्यम से चिकित्सा विज्ञान संस्थान, विज्ञान संस्थान तथा तथा सहयोगी इंजीनियरिंग विभागों में व्यापक अध्ययन, प्रिसीजन क्लिनिकल ट्रायल, मल्टी-ओमिक्स बायोमार्कर की खोज तथा अत्याधुनिक प्रयोगशाला विश्लेषण को बढ़ावा मिलेगा। इन परियोजनाओं के लिए अनुदान की स्वीकृति को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा, “चिकित्सा विज्ञान में उत्कृष्टता और सभी के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ-साथ मरीजों की देखभाल से जुड़े अपने बुनियादी ढांचे को भी सुदृढ़ कर रहा है। हमारा उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधानों और खोजों को बेहतर मरीज देखभाल में रूपांतरित करना है।”आयुर्विज्ञान संस्थान (IMS) के संकायों में चिकित्सा अनुसंधान और क्लिनिकल नवाचार के प्रति जबरदस्त उत्साह देखा गया है। संस्थान इस दिशा में अपने संकाय सदस्यों को अत्याधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान खोजने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। विश्वविद्यालय को यह अनुदान ऐसे समय में स्वीकृत किये गए हैं, जब विश्वविद्यालय में अनुसंधान गतिविधि और संकाय सदस्यों के उत्साह में अभूतपूर्व वृद्धि व उत्साह है। पिछले छह महीनों में, संकाय सदस्यों ने विभिन्न वित्त पोषण एजेंसियों को 200 से अधिक परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं, और कई के परिणामों की वर्तमान में प्रतीक्षा है। चिकित्सा विज्ञान संस्थान में डीन रिसर्च, प्रो. मनोज पांडे ने ऐसे महत्वपूर्ण एवं नवोन्मेषी अनुसंधानों को बढ़ावा देने और उनके लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के विश्वविद्यालय के प्रयासों को रेखांकित किया, जिनमें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की अकादमिक प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ समाज के लिए सार्थक योगदान देने की क्षमता है। प्रो. पांडेय ने कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य बाह्य स्रोतों से अधिकतम शोध अनुदान प्राप्त करना और विश्वविद्यालय में एक सुदृढ़ एवं सहयोगी शोध पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, ताकि दीर्घावधि में विश्वविद्यालय की संस्थागत रैंकिंग को बेहतर किया जा सके और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान दिया जा सके।”संस्थान के निदेशक प्रो. एस. एन. सांखवार ने कहा, “इन छह प्रतिष्ठित आईसीएमआर अनुदानों का प्राप्त होना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आईएमएस चिकित्सा अनुसंधान और मरीज-केंद्रित विज्ञान में निरंतर प्रगति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमारे चिकित्सक और शोधकर्ता उत्कृष्ट नैदानिक सेवाओं तथा उन्नत प्रयोगशाला अनुसंधान के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर रहे हैं।”चिकित्सा विज्ञान संस्थान में चिकित्सा अनुसंधान और नैदानिक नवाचार को लेकर संकाय सदस्यों में उल्लेखनीय उत्साह देखने को मिल रहा है। संस्थान अपने शोधकर्ताओं को स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी महत्वपूर्ण और जटिल चुनौतियों पर अत्याधुनिक अनुसंधान करने के लिए निरंतर प्रोत्साहित और सक्षम बना रहा है। यह शोध अनुदान ऐसे महत्वपूर्ण समय में प्राप्त हुआ है, जब भारत सरकार ने जैव-कित्सीय अनुसंधान, बौद्धिक संपदा सृजन और अनुसंधान के परिणामों को स्वास्थ्य सेवाओं में लागू करने को राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया है।

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