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बीएचयू के विश्‍वनाथ मंदिर में आयोजित रामकथा में बोलें अखिल दास- कलियुग में सत्संग मुक्ति का द्वार

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के श्री विश्वनाथ मंदिर में श्रावण के पावन मास में नौ दिवसीय संगीतमय श्री राम कथा की अमृत वर्षा के दूसरे दिन वैदिक मंत्रोच्चारण, गुरु व गणेश वंदना किया गया । उसके बाद परम पूज्य संत प्रख्यात राम कथा मर्मज्ञ कालरात्रि पीठाधीश्वर श्री अखिल दास जी महाराज ने अपनी अमृत वाणी से सत्संग की महत्ता का वर्णन किया । सत्य को साथ लिए सत्य के मार्ग पर सत्य लक्ष्य की ओर बढ़ने वाला कार्य ही सत्संग है । सत्संग संजोग से नहीं सुयोग से बनता है । सत्संग से ही सच्चा ज्ञान मिलता है । सत्संग प्रभु की कृपा से प्राप्त होता है । सत्संग सुनने मात्र से पूर्ण नहीं होता, जीवन में अनुसरण से पूर्ण होता है । बिना प्रभु अनुराग के सत्संग न कोई कह सकता है और न कोई सुन सकता है । सत्संग में आने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं । ईश्वर की प्राप्ति के लिए एकाग्रता जरूरी है । सच्चे मन से भगवान की पूजा व अर्चना करनी चाहिए । तुलसीदास जी ने कहा है कि नहि कलि रिम न भगति विवेकू, राम नाम अवलंबन एकू । नामू राम को कल्पतरु कलि कल्याण निवासू ।। अर्थात कलियुग में राम का नाम मनचाहा फल देने वाला है और मुक्ति का द्वार है । कलिजुग समजुग आनि नहि, जौ नर कर विश्वास, गई राम गुन विमल भव तर बिनहीं प्रयास । कलिजुग जोग न जग्य न ग्याना, एक आधार राम गुन गाना । संगीतमय भजनों से श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गए । सत्संग में बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित हुए । आज कथा प्रसंग में प्रभु श्री रामचन्द्र जी के जन्म उत्सव की कथा सुनाई गई । कथा में आरती के उपरांत भक्तजनों को प्रसाद का वितरण किया गया ।

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