लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप अनुभवात्मक, व्यावहारिक और समस्या-समाधान आधारित उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लखनऊ विश्वविद्यालय ने एक युगांतकारी निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में एक अत्याधुनिक *‘सेंटर फॉर केस स्टडीज’ (Centre for Case Studies)* स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी केंद्र का प्रमुख उद्देश्य किसी बाहरी या विदेशी सामग्री पर निर्भर रहने के बजाय विश्वविद्यालय स्तर पर ही अपनी मौलिक और स्वदेशी केस स्टडीज (In-house Case Studies) तैयार करना है। यह पहल केवल प्रबंधन या वाणिज्य तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विश्वविद्यालय के *समस्त विषयों*—विज्ञान, कला एवं मानविकी, सामाजिक विज्ञान, विधि, शिक्षा, इंजीनियरिंग, पत्रकारिता, ललित कला, स्वास्थ्य व पर्यावरण—के वास्तविक परिदृश्यों, समस्याओं और नवाचारों को केस स्टडीज के रूप में विकसित किया जाएगा।
प्रशिक्षण से लेकर निर्माण तक की सुदृढ़ त्रि-स्तरीय प्रक्रिया:
- शिक्षकों का सघन प्रशिक्षण (Faculty Training & Workshops):
केस स्टडीज तैयार करने से पहले विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों द्वारा केस राइटिंग (Case Writing), फील्ड रिसर्च, डेटा कलेक्शन और कक्षा में केस-आधारित शिक्षण पद्धति (Case Pedagogy) पर व्यावहारिक कार्यशालाएं व ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित होंगे।
- समस्त विषयों में बहुविषयक केस निर्माण (Multidisciplinary Case Creation):
प्रशिक्षण उपरांत शिक्षक और शोधार्थी अपने-अपने विषयों से जुड़ी जमीनी चुनौतियों, लोक प्रशासन, स्थानीय उद्योगों, सामाजिक बदलावों, कानूनी विवादों, तकनीकी विफलताओं व सफलताओं पर केस स्टडीज तैयार करेंगे।
3.रॉयल्टी मॉडल पर आधारित भुगतान (Royalty-Based Remuneration):
शिक्षकों और शोधकर्ताओं की बौद्धिक संपदा तथा मेहनत को प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालय ने एक पारदर्शी ‘रॉयल्टी मॉडल’ (Royalty Model) तैयार किया है। इसके अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण केस स्टडीज तैयार करने वाले शिक्षकों व शोधकर्ताओं को उनके केस के उपयोग, प्रकाशन और वितरण के आधार पर विधिवत रॉयल्टी/भुगतान प्रदान किया जाएगा, जिससे शिक्षकों में मौलिक लेखन के प्रति स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और प्रोत्साहन बना रहे।
कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी ने बताया कि उच्च शिक्षा की वास्तविक सार्थकता केवल क्लासरूम में किताबी सिद्धांत पढ़ाने और डिग्री वितरित करने तक सीमित नहीं हो सकती। आज के दौर में विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है जो उन्हें वास्तविक दुनिया की जटिल चुनौतियों, त्वरित निर्णय क्षमता और व्यावहारिक समाधान तलाशने में दक्ष बनाए। हमारे देश और प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी परिवेश में अध्ययन के अनगिनत जीवंत विषय मौजूद हैं। प्रस्तावित ‘सेंटर फॉर केस स्टडीज’ हमारे सभी संकायों और विषयों के शिक्षकों के लिए एक उत्कृष्ट अकादमिक मंच बनेगा। शिक्षकों को पहले केस राइटिंग का उच्चस्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा और फिर उनके द्वारा तैयार केस स्टडीज के लिए ‘रॉयल्टी मॉडल’ के तहत भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। जब शिक्षक अपनी स्थानीय और समसामयिक परिस्थितियों पर केस लिखेंगे, तो विद्यार्थी समस्याओं को सीधे अपनी जमीन से जोड़कर समझ सकेंगे। यह पहल हमारे विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक व निर्णय क्षमता को मजबूत करेगी और लखनऊ विश्वविद्यालय को ज्ञान निर्माण के एक आत्मनिर्भर थिंक-टैंक के रूप में स्थापित करेगी।”*
सेंटर फॉर केस स्टडीज के मुख्य लाभ:
कक्षाओं में व्यावहारिक बदलाव: पारंपरिक व्याख्यान (Lecture Method) की जगह विद्यार्थी वास्तविक केसों का विश्लेषण करेंगे, जिससे उनकी क्रिटिकल थिंकिंग मजबूत होगी।
स्वदेशी ज्ञान भंडार (Indigenous Repository): विश्वविद्यालय का अपना विशाल डिजिटल केस बैंक तैयार होगा, जिसे अन्य राज्य व राष्ट्रीय संस्थानों के साथ भी साझा किया जा सकेगा।
शिक्षकों को अकादमिक व वित्तीय प्रोत्साहन: रॉयल्टी मॉडल लागू होने से शिक्षकों में गुणवत्तापूर्ण शोध, फील्ड स्टडी और मौलिक लेखन की संस्कृति को नया संबल मिलेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द ही इस केंद्र के विस्तृत दिशा-निर्देश, प्रशिक्षण कैलेंडर और रॉयल्टी भुगतान के नियमों को अंतिम रूप देकर अधिसूचित करेगा।
Purvanchal News जोड़े आपको पूर्वांचल से….