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एमएमएमयूटी, गोरखपुर में उत्साह के साथ मनाया गया अभियंता दिवस, अभियंताओं की भूमिका पर हुआ मंथन

लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर की छात्र क्रिया कलाप परिषद के तत्वावधान में सोमवार को इंजीनियर्स डे उत्साहपूर्वक मनाया गया। महान अभियंता और भारत रत्न श्री मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने तथा राष्ट्र और समाज के विकास में अभियंताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के 2001 बैच के पूर्व छात्र ईं. अमरीश प्रकाश पांडे (आईईएस-2007), मुख्य यांत्रिक अभियंता, पूर्वोत्तर रेलवे, रेल मंत्रालय, भारत सरकार रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने की।मुख्य अतिथि अमरीश प्रकाश पांडे ने अपने संबोधन में राष्ट्र निर्माण में अभियंताओं की महती भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अभियंता केवल तकनीकी समस्याओं का समाधान करने वाले विशेषज्ञ नहीं हैं, बल्कि वे देश के विकास की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बुनियादी ढांचे के विकास से लेकर आधुनिक तकनीक, नवाचार और नई कार्यप्रणालियों के विकास तक अभियंताओं का योगदान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी परिवर्तन बहुत तेजी से हो रहा है और ऐसे में युवाओं के लिए अपनी तकनीकी दक्षता के साथ नवाचार की क्षमता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी अत्यधिक टेक-सैवी है और आधुनिक तकनीक को तेजी से आत्मसात कर रही है। युवाओं में नई चीजें सीखने, प्रयोग करने और समस्याओं के नए समाधान तलाशने की क्षमता है। यदि इस तकनीकी समझ को रचनात्मक और नवाचारी सोच के साथ जोड़ा जाए तो युवा देश को प्रगति के पथ पर और तेजी से आगे ले जा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक के केवल उपभोक्ता बनने के बजाय उसके माध्यम से नए समाधान विकसित करने और समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को समझते हुए काम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी ज्ञान का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका उपयोग देश और समाज के लिए उपयोगी एवं सार्थक परिणाम उत्पन्न करने में किया जाए।अभियंता दिवस समारोह के दौरान आंतरिक स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के विजेता विद्यार्थियों के लिए पुरस्कार वितरण समारोह भी आयोजित किया गया। माननीय कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय परिसर में तकनीकी प्रतिस्पर्धा, नवाचार और समस्या-समाधान के प्रति उत्साह का वातावरण देखने को मिला।अपने अध्यक्षीय संबोधन में माननीय कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में हासिल की गई ऐतिहासिक सफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन उपलब्धियों के पीछे देश की वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमता के साथ इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि भारतीय वैज्ञानिकों और अभियंताओं में जटिल तकनीकी चुनौतियों का समाधान खोजने तथा अपनी क्षमताओं के बल पर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने की पूरी क्षमता है।उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग केवल तकनीकी ज्ञान और मशीनों तक सीमित क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह देश के समग्र निर्माण और विकास की आधारशिला है। किसी भी राष्ट्र की प्रगति में उसकी तकनीकी क्षमता, नवाचार और समस्या-समाधान की दक्षता का महत्वपूर्ण योगदान होता है। ऐसे में इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों की जिम्मेदारी केवल अपनी शिक्षा और करियर तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अपनी तकनीकी दक्षता का उपयोग समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं को समझने तथा उनके समाधान विकसित करने के लिए भी करना चाहिए।कुलपति जी ने विद्यार्थियों को नवाचार के साथ-साथ अपने कार्य में निष्ठा और ईमानदारी को सर्वोच्च महत्व देने का संदेश दिया। उन्होंने प्रसिद्ध भारतीय उद्योगपति नारायण मूर्ति के दूरदर्शी योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता और स्थायी उपलब्धि के लिए प्रतिभा एवं तकनीकी ज्ञान के साथ कार्य के प्रति प्रतिबद्धता, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का होना भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग जिम्मेदारी के साथ करते हुए देश के विकास में सार्थक योगदान देने का प्रयास करें।उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी तकनीकी परिवर्तन के दौर में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और उनके सामने अपने ज्ञान को व्यवहार में उतारने के अनेक अवसर हैं। तकनीकी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में विद्यार्थियों को सीखने की निरंतर प्रक्रिया को बनाए रखते हुए टीम भावना, व्यावहारिक कौशल और नवाचारी दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा और अवसर प्रदान करना है, जिससे वे भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकें और अपने कार्य से समाज तथा राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकें।समारोह में छात्र क्रियाकलाप परिषद के अध्यक्ष प्रो. बी.के. पाण्डेय, तकनीकी उप परिषद के संकाय सलाहकार डॉ. पल्लव गुप्ता तथा एमएमएमयूटी रेसो के संकाय प्रभारी डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। वक्ताओं ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें व्यावहारिक कौशल विकसित करने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा नए तकनीकी आयाम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने मुख्य अतिथि ईं. अमरीश प्रकाश पांडे को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इसके बाद धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ।

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