लखनऊ। “पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीयता के महत्वपूर्ण चिंतक थे। उन्होंने अंत्योदय और एकात्म मानवदर्शन का जो सिद्धांत दिया, उसी पर चलकर भारत विश्व गुरु बनेगा। उनके दर्शन के अनुरूप लखनऊ विश्वविद्यालय स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ अपने उद्देश्यों की पूर्ति करते हुए निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।” यह विचार मुख्या अतिथि के रूप में कार्यक्रम में सम्मिलित हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती मना रहा है और शोध पीठ उनके विचारों को शोध एवं अकादमिक गतिविधियों के माध्यम से आगे बढ़ाने का कार्य कुशलतापूर्वक कर रही है। इस अवसर पर उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण, विद्यार्थियों के लिए मिनी लेक्चर रूम एवं पुस्तकालय का उद्घाटन, शोध पीठ के लोगो का लोकार्पण तथा शोध पत्रिका ‘अंत्योदय’ के द्वितीय खंड का विमोचन किया। उन्होंने यह भी कहा कि शोष पीठ ने अपना लोगो विमोचित कर एक अनूठी पहल को प्रारंभ किया है। कुलपति ने शोध पीठ की शोध पत्रिका ‘अंत्योदय’ की सराहना करते हुए कहा कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे शिक्षकों एवं शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशन के लिए बेहतर मंच उपलब्ध हो सके। उन्होंने शोध पीठ के लोगो को भी अपनी तरह का अनूठा प्रयास बताया। विशष्ट अतिथि कला संकायाध्यक्ष प्रो. अरविन्द मोहन ने कहा कि विद्यार्थियों को भारतीय चिंतन एवं सामाजिक सरोकारों से जोड़ना विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अंत्योदय दिवस के अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जनहित के दर्शन को आत्मसात करते हुए विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक एवं सामाजिक वातावरण तैयार कर सकता है। उन्होंने शोध पीठ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि शोध पीठ उत्साहपूर्वक कार्य कर रही है और पिछले वर्षों में उसने उल्लेखनीय कार्य किए हैं। कार्यक्रम के संयोजक एवं शोध पीठ के निदेशक प्रो. राकेश द्विवेदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोध पीठ की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शोध पीठ एकात्म मानवदर्शन को आधार बनाकर शोध, शिक्षा एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को निरंतर विस्तार दे रही है। उन्होंने बताया कि शोध पीठ द्वारा विकसित मिनी लेक्चर रूम एवं पुस्तकालय विद्यार्थियों, विशेष रूप से छात्राओं, को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानवदर्शन, अंत्योदय एवं भारतीय चिंतन के अध्ययन के साथ शोध के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के निर्माण अधीक्षक एवं गणित विभाग के शिक्षक प्रो. विनीत वर्मा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानवदर्शन और अंत्योदय का विचार समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण की दिशा में मार्गदर्शन देता है। विश्वविद्यालय में शोध पीठ द्वारा उनके विचारों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने और शोध के माध्यम से आगे बढ़ाने के प्रयास सराहनीय हैं। कार्य्रकम में विभाग के वरिष्ठतम शिक्षक प्रो. डी. के. सिंह, प्रो. अनूप कुमार भारतीय, प्रो. रुपेश कुमार, प्सरो. पवन अग्हिरवाल, अर्तथशास्त्र विभाग की अध्यक्षा प्रो. रोली मिश्रा, डॉ. ए.बी. जोशी, डॉ. अन्विता वर्मा, डॉ. रमेश त्रिपाठी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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