गाजीपुर। ‘साहित्य चेतना समाज’ के तत्वावधान में ‘चेतना -प्रवाह’ कार्यक्रम के अन्तर्गत शान्तिनिकेतन इण्टर कालेज बरही,गाजीपुर के प्रधानाचार्य प्रकाश चन्द्र दूबे के सरैयाँ स्थित आवास पर एक सरस काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारम्भ कवि संजय पाण्डेय की वाणी-वंदना से हुआ। संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने कवियों एवं आगंतुक श्रोताओं का वाचिक स्वागत करते हुए चेतना-प्रवाह के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।तत्क्रम में संजय पाण्डेय एवं संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी के अनुगायन की सांगीतिक प्रस्तुति ने उपस्थित समस्त जन को आनन्द-विभोर कर दिया।युवा कवि मनोज कुमार ने “मर्द को दर्द नहीं होता है, बहुत सुना है हमने/मगर बिना दर्द के कोई मर्द हो नहीं सकता” अपनी इन पंक्तियों के द्वारा कविता में पुरुष-विमर्ष को प्रतिष्ठित करते नज़र आए। युवा शायर गोपाल गौरव ने अपनी ग़ज़ल “आग ही आग होगी जिधर जाओगे/तुम चमन को जला कर किधर जाओगे” सुना कर खूब वाहवाही लूटी। इसी क्रम में आशुतोष श्रीवास्तव ने अपनी व्यंग्य- कविता “वो इंसान था या काग़ज़ का पुलिंदा/राशनकार्ड में मर गया/आधार में था ज़िन्दा” सुना कर सोचने पर मजबूर किया। युवा नवगीतकार डा. अक्षय पाण्डेय ने अपना नवगीत “धूल-धुआँ से भरे सफ़र में/आई है अम्मा/पहली-पहली बार शहर में/आई है अम्मा” की सस्वर प्रस्तुति ने श्रोताओं को तालियां बजाने के लिए विवश किया। संस्था के संस्थापक एवं वरिष्ठ व्यंग्यकार अमरनाथ तिवारी ने अपनी व्यंग्य-कविता “गली में नेताजी का शव पड़ा है/उनकी अन्त्येष्टि में सहयोग कीजिए/और दस रुपए का चन्दा दीजिए” खूब प्रशंसित हुई। संजय पाण्डेय ने अपना गीत “आ तुझे मैं प्यार करूं और तू कुछ ना बोले” ने प्रशंसा अर्जित किया। भोजपुरी एवं हिन्दी के गीतकार हरिशंकर पाण्डेय अपना भोजपुरी गीत “कहनी शुरू बाटे, बेटी बेटी-महतरिया/रोटिया बनीं कहिया हो/होत भिनसरवे घनघनाएले मोबाइल/काम-धाम छोड़ि के धियवो पराइल” प्रस्तुत कर ख़ूब तालियां बटोरी। इसी क्रम में कन्हैया गुप्त ‘विचारक’ ने अपनी कविता “पापा जी की परी है प्यारी/जिद्द अपनी मनवाती है/जिद्द करके पापा जी से/मोबाइल मंगवाती है” पर खूब वाहवाही लूटी। वीर रस के वरिष्ठ कवि दिनेशचन्द्र शर्मा ने “रात कब ढल गई सितारों से पूछो/लहरें कितना मचलतीं हैं किनारों से पूछो”सुनाकर श्रोताओं में जोश भर दिया।नगर के वरिष्ठ ग़ज़ल-गो कुमार नागेश की इन गीत-पंक्तियों “रातें जितनी देर रुकें पर वक्त सरकता रहता है/मन पत्थर हो जाए जितना/दिल तो धड़कता रहता है ” ने खूब प्रशंसा अर्जित की। नगर के वरिष्ठ महाकाव्यकार कामेश्वर द्विवेदी ने अपनी छान्दस कविता “प्रेम शब्द मात्र अब ग्रंथों में दिखाई देता/नहीं व्यवहार में है लाता कोई आज है” सुना कर खूब प्रशंसा पायी। इस सरस काव्यगोष्ठी में श्रोता के रूप में सुधीर पाण्डेय,सुनील सिंह,तेज प्रताप सिंह, रामानुज राय,प्रभात कुमार मिश्र, यशोवर्धन दूबे, अनन्त कुमार दूबे, अमृत कुमार दूबे, वीरेन्द्र भारती,राम प्रवेश आदि उपस्थित रहे। इस कवि-गोष्ठी की अध्यक्षता बटुक नारायण मिश्र एवं संचालन डॉ.अक्षय पाण्डेय ने किया। श्री प्रकाश चन्द्र दूबे ने आगंतुक कवियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
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