लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर में 09 से 30 जून 2025 तक आयोजित 21 दिवसीय संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) आधारित कार्यक्रम श्रृंखला का समापन 30 जून को भव्य समारोह के साथ संपन्न हुआ। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया और सतत विकास के महत्व पर विचार साझा किए। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में 21 दिवसीय कार्यक्रम श्रृंखला के समापन समारोह की शुरुआत माँ सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम में एसबीआई, एमएमएमयूटी शाखा के प्रबंधक खालिद परवेज सिद्दीकी ने सतत विकास में बैंकिंग क्षेत्र की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की। इसके पश्चात डॉ. मिलिंद राज आनंद, सहायक प्रोफेसर, एचएसएसडी, एमएमएमयूटी ने कार्यक्रम की उपलब्धियों पर अपने विचार साझा किए। प्रो. प्रभाकर तिवारी, सलाहकार, IEEE एसटीबी, एमएमएमयूटी ने छात्रों के जीवन में सतत विकास लक्ष्यों की भूमिका पर विशेष प्रकाश डालते हुए IEEE शाखा के योगदान की चर्चा की। एचएसएसडी विभागाध्यक्ष एवं एनडीएलआई क्लब अध्यक्ष डॉ. सुधीर नारायण सिंह ने कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि 21 दिनों में कुल 15 विशेषज्ञ व्याख्यान, 5 सेमिनार और 1 अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। उन्होंने बताया कि यह आयोजन माननीय कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी के मार्गदर्शन के बिना संभव नहीं था। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अक्षय कुमार श्रीवास्तव, सीईओ एवं सह-संस्थापक, एलसीबी फर्टिलाइजर्स ने सतत विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे। मुख्य अतिथि प्रो. बी.के. पांडेय, अध्यक्ष सीएसए एवं विभागाध्यक्ष, भौतिकी एवं सामग्री विज्ञान, एमएमएमयूटी ने भारतीय दृष्टिकोण से सतत विकास लक्ष्यों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने लुक ईस्ट पॉलिसी की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए आधुनिक सभ्यता की समस्याओं के समाधान पर बल दिया। इसके बाद सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। डॉ. अंजलि सिंह, आयोजन सचिव एवं सहायक प्रोफेसर, एमएसडी विभाग ने समापन वक्तव्य में कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी सहित सभी सहयोगी संकाय सदस्यों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर डी.एम. पांडेय (सदस्य-सचिव, एनडीएलआई क्लब), डॉ. ए.के. पांडेय (चिकित्सा अधिकारी), डॉ. प्रियंका राय, डॉ. सोनिया भट्ट, डॉ. फैजान अहमद, डॉ. जावेद आलम, व अन्य संकाय सदस्य एवं छात्र-छात्राएं जैसे स्वीटी राय, तान्या, गरिमा यादव, वंशिका श्रीवास्तव, रूहीना प्रसाद आदि उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम न केवल छात्रों में सतत विकास की समझ बढ़ाने का माध्यम बना, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं सामाजिक प्रतिबद्धता का भी प्रतीक रहा।
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