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ज्ञान किसी की बपौती नहीं, कोई भी ज्ञानी व्‍यक्ति कह सकता है कथा- महामंडलेश्‍वर स्‍वामी भवानी नंदन यति

गाजीपुर। सिद्धपीठ हथियाराम के पीठाधीश्‍वर महामंडलेश्‍वर स्‍वामी भवानी नंदन यति जी ने कहा कि ज्ञान किसी की बपौती नही है। ज्ञानी व्‍यक्ति चाहे वह किसी भी समाज, जाति का हो, अगर वह नियमसंगत शुद्धतापूर्वक कथा कहता है तो मैं उसका समर्थक हूं। स्‍वामी भवानीनंदन यति जी ने बताया कि सत्‍यनारायण भगवान की कथा जो ब्राह्मण समाज घर-घर जाकर कहता है उस कथा को पहली बार 88 हजार ऋषियों को सूत नाम के एक व्‍यास ने उन्‍हे कथा सुनाई थी। ज्ञान किसी की बपौती नही है जो ज्ञानी है वह कथा कह सकता है। नाचना, गाना, कूदना और मनोरंजन करना यह कथा का अभिप्राय नही है। कथा अंर्तजगत के लिए होती है कथा मुक्ति मोक्ष के लिए होती है कथा समरसता बनाये रखने के लिए होती है। तथा कष्‍ट निवरण के लिए होती है जो अपने ज्ञान से लोक कल्‍याण कर सके। लोगों का मार्गदर्शन कर भगवत के मार्ग पर ले जाये उसे कथा करना चाहिए। कथा एक व्‍यासपीठ है उसके मर्यादा का सभी को ख्याला रखना होगा। शुद्धि-अशुद्धि का ख्‍याल रखना होगा। अशुद्धिपूर्वक कथा कहना अनुचित होगा। शुद्धिपूर्वक और नियमपूर्वक कथा कहने वालों का मैं समर्थक हूं।

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