गाजीपुर। जनपद के नौली उतरौली व त्रिलोकपुर क्षेत्र में स्थित प्राचीन गंगा धारा नगरी के श्री रूद्रांबिका धाम शिवकाली मंदिर परिसर से सैकड़ो माताओं- बहनों ने पीतवस्त्र में सिर पर कलश लेकर कई गांवों का भ्रमण किया। शिवकाली मंदिर परिसर में प्रातः 8:00 बजे से ही माताओं- बहनों का तांता लगना शुरू हो गया। धीरे-धीरे मंदिर परिसर पीत वस्त्र धारी महिलाओं से खचाखच भर गया। यज्ञाचार्य पंडित धनंजय पांडे के द्वारा वैदिक कर्मकांड व मंत्रोच्चार से विधिवत कलश पूजन कराया गया। तत्पश्चात देवताओं के आवाहन के साथ विधिवत मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। परिसर में मौजूद भाइयों-बहनों ने एक साथ मां काली व शिव का जयकारा लगाते रहे। कलश पूजन के उपरांत जल भरन के लिए कई गांव से आई हुई माताओं- बहनों ने पीतवस्त्र धारण कर सिर पर कलश रखते हुए गंगा माता की जय, काली माता की जय, भोले बाबा की जय- इन जयकारों के साथ गांव और क्षेत्र भ्रमण के लिए निकली। अनुशासनपूर्वक ग्राम वासियों ने यज्ञ अनुष्ठान को सफल बनाने तथा जन जागरूकता के लिए देवी देवताओं के लिए नारे लगाते रहे। भव्य शोभायात्रा में माताओं- बहनों ने मंगल गीत से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। शोभायात्रा में शामिल हाथी, घोड़े, बैंड बाजे से युक्त भक्ति गीतों से मानो पूरा क्षेत्र धार्मिक भावनाओं में डूब गया हो। शोभायात्रा में शामिल गांव क्षेत्र के नवयुवकों ने बुलंद आवाज में पूरी ऊर्जा से जयकारा लगाते हुए गांव क्षेत्र में रमें रहे। भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं को जल पीने की व्यवस्था भी रही। जलपान करने के बाद शोभायात्रा वापस पुनः उसी उत्साह उमंग से यज्ञ स्थल पर पहुंचा ,जहां पहले से उपस्थित श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। यज्ञाचार्य डाॅ पांडे ने मंत्रोच्चार करते हुए माताओं बहनों का जलाभिषेक किए। इस मौके पर कार्यक्रम व्यवस्थापक व यज्ञाचार्य पंडित धनंजय पांडे ने कलश यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कलश यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं पर भगवान की विशेष कृपा होती है। क्योंकि एक कलश में तैंतीस कोटि के देवताओं का वास होता है। सिर पर कलश रखकर चलने वाले श्रद्धालुओं का घर सुख-समृद्धि से भर जाता है। जन्मों-जन्मों के दुख व कलेश मिट जाते हैं। मनुष्य महान पुण्य का भागी बनता है। आज आपाधापी के समय में मनुष्य भागवत कार्य में श्रमदान और समय दान करता है,उसे कई लाख गुना वापस परमात्मा का प्रसाद उसे मिलता है ।शोभा यात्रा के समापन के बाद श्री राम कथा प्रारंभ की गई। तत्पश्चात सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम में समस्त ग्राम वासियों व क्षेत्र वासियों का विशेष योगदान रहा।
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