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कृषि विज्ञान केंद्र सोहाँव, बलिया के किसानों को दी गई गेहूं के बीज उत्‍पादन की तकनीकी जानकारी

बलिया। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र सोहाँव, बलिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ संजीत कुमार तथा कार्यक्रम सहायक कृषि धर्मेंद्र कुमार ने कृषि विभाग द्वारा आयोजित किसान दिवस में प्रतिभाग कर किसानों के साथ संवाद किया, जिसके दौरान डॉ संजीत कुमार ने गेहूं की बीज उत्पादन तकनीक विषय पर विस्तृत जानकारी दिया, उन्होंने कहा कि किसान भाई गेहूं की व्यवसायिक फसल के स्थान पर गेहूं को बीज उत्पादन फसल के रूप में उगाए जिनका पंजीकरण बीज प्रमाणीकरण संस्था से करा ले गेहूं की बीज उत्पादन फसल को उगाने के लिए प्रजनक बीज या आधार या आधारीय बीज की आवश्यकता पड़ती है किसान भाई  प्रजनक बीज या आधार बीज, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज अयोध्या से खरीद सकते हैं या फिर गेहूं अनुसंधान निदेशालय करनाल से खरीद सकते हैं l किसान भाई यह भी देख ले कि बीज यदि उपचारित ना किया हो तो कार्बेण्डाज़िम की 2.5 ग्राम मात्रा को प्रति किलो बीज के हिसाब से मिलाकर उपचारित कर लें l खेत की तैयारी के लिए पहली जुताई मिट्टी पलट हल से करने के बाद तीन-चार जुताई कल्टीवेटर से करके मिट्टी को भुरभुरी बना ले, प्रत्येक जुताई के बाद पाटा अवश्य लगाये l एक हेक्टर क्षेत्रफल गेहूँ का बीज उत्पादन हेतु, बुवाई के लिए 90 से 100 किलोग्राम बीज का उपयोग करें बीज को सीडड्रिल या हैप्पी सीडर की सहायता से लगभग 22 सेंटीमीटर दूरी पर लाइनों में बुवाई करें l पोषक तत्व प्रबंधन के लिए गोबर की सड़ी हुई खाद उपलब्ध हो तो 8 से10 टन अच्छी प्रकार से सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टर की दर से बुवाई से एक सप्ताह पूर्व खेत में अच्छी प्रकार से मिला दे,  इसके अलावा 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस एवं 50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टर की दर से उपयोग करें l फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा एवं नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के पूर्व खेत की तैयारी के समय भूमि में 10 से 15 सेंटीमीटर की गहराई तक अच्छी प्रकार से मिला दे l नाइट्रोजन की शेष बची मात्रा को खड़ी फसल में 25% कल्ले निकलते समय बुवाई के लगभग 30 से 35 दिन बाद उचित नमी की दशा में उपयोग करें शेष बची 25% नाइट्रोजन को खड़ी फसल में upyबुवाई निकलने से पूर्व बुवाई के लगभग 90 से 95 दिन बाद बिखेर कर उपयोग करेंl डॉ संजीत कुमार ने कहा कि किसान भाई गेहूं की बीज उत्पादन वाली फसल में पहली सिंचाई बुवाई के लगभग 20 से 21 दिन बाद 5 सेंटीमीटर की गहराई तक करें वर्षा ने होने की दशा में 15 से 20 दिन की अंतराल पर खेत की सिंचाई करते रहें बारिश होने पर फालतू पानी खेत से बाहर निकाल दे जिससे फसल पर जल की अधिकता का नकारात्मक प्रभाव न पड़े l डॉ संजीत कुमार ने कहा कि किसान भाई फसल की निगरानी करते रहें यदि किसी प्रकार का रोग या कीट फसल पर लग रहा हो तो उसके उचित प्रबंधन की व्यवस्था करें और खेत में खरपतवार प्रबंधन भी करते रहें बालियां निकलने के बाद फसल को देख-रेख करते रहे l गेहूँ बीज उत्पादन की फसल में यदि कोई बाली असामान्य गुणो वाली तो दिखाई दे रही है, यदि कोई बाली या पौधे की लंबाई बोई गई प्रजाति से छोटी या बड़ी हो तो उसको रॉगिंग करके बीजो उत्पादन फसल से निकाल कर बीज की फसल दूर जमीन में गाड़ दे l जैसे ही फसल पक जाती है तो उसकी तत्काल कटाई कर दे कटाई के समय भी यदि कोई अन्य प्रजाति की बाली या पौधा दिखाई दे तो उसको भी बीज की फसल से अलग करके नष्ट कर दें उसके बाद यदि संभव हो सके तो मज़दूरों के द्वारा बीजोत्पादन फसल मड़ाई का कार्य कराया सकता है, मजदूरों की अनुपलब्धता की दशा में थ्रेसिंग से पूर्व थ्रेसर की अच्छी प्रकार से सफाई कर ले उसमें देख ले कि किसी अन्य फसल या गेहूं की फसल के अन्य दाने मौजूद न हो l मड़ाई की गई फसल को बीज विधायन संयंत्र में ले जाकर प्रोसेसिंग एवं पैकिंग का कार्य कराले l सामान्य रूप से 40 किलोग्राम की पैकिंग बनाएं और पैकिंग के समय बीज प्रमाणीकरण संस्था द्वारा उपलब्ध कराए गए बीज प्रमाणिकरण टैग को बीज के बोरों के साथ नत्थी कर दें इसके बाद आप तैयार बीजों के बैग को किसी भी सरकारी तथा गैर सरकारी संस्था को बिक्री करके अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैंl किसान दिवस के समापन के बाद कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने विकासखंड गढ़वाल के ग्राम त्रिकालपुर प्रगतिशील किसानों विनोद कुमार सिंह, कमलेश सिंह, कन्हैया, हरिनारायण सिंह, बेचन प्रसाद, विरेन्द्र बर्मा, सरल सिंह, राम लाल यादव, शिवशंकर परशुराम सिंह, नमोनारायण वर्मा, लाल जी सिंह, संध्या सिंह, आदि  के प्रक्षेत्र पर भ्रमण कर फसलो का अवलोकन किया l धान की फसल में कीट प्रबंधन, रोग प्रबंधन सिंचाई एवं जल निकास प्रबंधन के बारे में विस्तृत चर्चा किया l साथ ही साथ वैज्ञानिकों ने दुधारू पशुओं के लिए हरा चारा प्रबंधन, दाना प्रबंधन एवं उनके स्वास्थ्य प्रबंधन आदि विषयो पर चर्चा किया l डॉ संजीत कुमार ने सभी किसानों को आगामी आने वाली रबी की फसलों के लिए बीज की व्यवस्था, खाद एवं उर्वरक की व्यवस्था एवं खेत की तैयारी के लिए किसानों को जानकारी दिया प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान क्षेत्र के लगभग 25 किसान उपस्थित रहे l प्रक्षेत्र भ्रमण का कार्य संपन्न होने के बाद प्रगतिशील किसान विनोद कुमार सिंह ने सभी वैज्ञानिकों एवं किसानों आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद कियाl

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