लखनऊ। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने एक बड़ा फैसला लिया. आयोग ने एक बार फिर से भर्ती परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सवालों में गड़बड़ी को लेकर बड़ी कार्रवाई की है. आयोग ने 315 विषय विशेषज्ञों को पैनल से बाहर कर दिया है. आयोग ने विशेषज्ञों के खिलाफ बीते तीन साल में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई की है. इससे पहले आयोग ने 30 जुलाई 2023 को 100 और 22 अगस्त 2022 को लगभग 80 विशेषज्ञों को पैनल से बाहर कर दिया था. लेकिन इस बार की गई कार्रवाई सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। यूपी लोक सेवा आयोग के परीक्षा नियंत्रक हर्षदेव पांडेय के मुताबिक, चयन प्रक्रिया से संबंधित गोपनीय काम जैसे प्रश्न पत्र तैयार करना और मूल्यांकन की गुणवत्ता की आयोग द्वारा नियमित रूप से समीक्षा की जाती है. इस बार जब विषय विशेषज्ञों के कार्यों का मूल्यांकन किया गया तो पता चला कि कई विशेषज्ञ नियमों और तय मानकों के तहत काम नहीं कर रहे हैं. इसके बाद आयोग ने 315 विषय विशेषज्ञों को गोपनीय कार्यों से हटा दिया है. यूपीपीएससी के अधिकारियों का कहना है कि विशेषज्ञों के कार्य निष्पादन की गुणवत्ता की निरंतर समीक्षा के लिए संस्थागत व्यवस्था भी विकसित कर ली गई है। आयोग के अधिकारियों की माने तो विशेषज्ञों की काम की गुणवत्ता की अब लगातार समीक्षा की जाएगी. जो विशेषज्ञ नियमों और गुणवत्ता के अनुसार काम नहीं करेंगे उन्हें भविष्य में पैनल से बाहर कर दिया जाएगा. आयोग ने चयन प्रक्रिया संबंधी गोपनीय कार्य को बेहतर और अधिक गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए देश के जाने-माने और योग्य विशेषज्ञों को पैनल में शामिल किया है. आयोग के अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में विषय विशेषज्ञों के पैनल को और अधिक मजबूत किया जाएगा। बता दें कि पीसीएस 2024 और समीक्षा अधिकारी व सहायक समीक्षा अधिकारी 2023 की भर्ती परीक्षाओं में गलत प्रश्नों को लेकर प्रतियोगी छात्रों ने काफी विरोध प्रदर्शन किया था. उसके बाद ही आयोग की ओर से विषय विशेषज्ञों के खिलाफ कार्रवाई के कयास लगाए जा रहे थे। गौरतलब है, यूपी लोक सेवा आयोग अपनी भर्ती परीक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए देशभर के विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को पैनल में शामिल करता है. इसके लिए प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन आवेदन लिए जाते हैं. विषय विशेषज्ञ की सेवाएं प्रश्न पत्र बनाने, मॉडरेशन और कॉपियों के मूल्यांकन के साथ ही साक्षात्कार में भी ली जाती हैं. मगर, पिछली कुछ भर्तियों से यह देखने में आ रहा था कि परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न या फिर उनके विकल्प गलत हैं. इसकी वजह से अक्सर भर्तियों में पूछे गए सवालों का विवाद अदालत में पहुंच जाता था या फिर अभ्यर्थियों द्वारा सड़कों पर उतरकर आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाता था. ऐसी स्थिति को देखते हुए ही यूपी लोकसेवा आयोग ने यह कड़ा फैसला लिया है।
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