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गाजीपुर: प्रख्‍यात साहित्‍यकार डा. जितेंद्र पाठक के पुण्‍यतिथि पर दी गई श्रद्धांजलि

गाजीपुर। डॉक्टर जितेंद्र पाठक की प्रथम पुण्यतिथि उनके निवास स्थान रवींद्र पुरी गाजीपुर में मनाई गईl इस अवसर पर बोलते हुए विशिष्ट अतिथि पीजी कॉलेज गाजीपुर के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष अध्यक्ष डॉ अंबिका पांडे ने कहा कि पाठक जी गाजीपुर के साहित्य आकाश के सूर्य थे। उन्होंने पाठक जी की कविता ‘सीता विषाद ‘की चर्चा की ।इसके पश्चात पीजी कॉलेज गाजीपुर के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष विनय कुमार दुबे ने डॉक्टर जितेंद्र पाठक से जुड़े अपने संस्मरण सुनाए  और बताया कि पाठक जी के साहित्य के ऊपर वो एक शोध कार्य भी करवा रहे हैं।.पी.जी. कॉलेज गाजीपुर के संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ समरेंद्र मिश्रा ने कहा कि डॉक्टर जितेंद्र नाथ पाठक ने स्त्री के चरित्र को नई ऊंचाई दीl’ शाम ‘कविता के माध्यम से उन्होंने अद्भुत प्रकृति चित्रण किया lडॉ संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि’ कुछ लोग हैं जो वक्त के सांचे में ढल गए ।कुछ लोग हैं जो वक्त के सांचे बदल गए ।।डॉक्टर जितेंद्र पाठक ,डॉक्टर पी एन सिंह ,डॉक्टर विवेकी राय, डॉक्टर कुबेरनाथ राय ,डॉ उमाशंकर तिवारी डॉक्टर भोलानाथ तिवारी ऐसे ही साहित्यकार थे ,जिन्होंने गाजीपुर की साहित्य की धारा के सांचे को बदला। इस अवसर पर गणित विभाग के पूर्व विभाग अध्यक्ष डॉ रमाशंकर सिंह जी ने कहा कि ‘अतीतजीवी और काल ‘रचना डॉक्टर जितेंद्रनाथ पाठक की कालजयी रचना है और इस रचना के लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलना चाहिए था। पी.जी .कॉलेज गाजीपुर के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ दिनेश सिंह जी ने पाठक जी को एक श्रेष्ठ कवि, कहानीकार ,आलोचक और निबंधकार बताया ।पाठक जी की पुत्री डॉक्टर कल्पना पांडे ने बिंबों और प्रतीकों से भरी हुई एक कविता के माध्यम से अपने पिता को याद किया ।डॉक्टर युधिष्ठिर तिवारी जो कि पीजी कॉलेज संस्कृत विभाग के पूर्व विभाग अध्यक्ष थे ,उन्होंने कहा कि पाठक जी की कविता ‘अतीतजीवी और काल’का काशी हिंदू विश्वविद्यालय में उस समय के महान आचार्य श्री रेव पांडे ने संस्कृत में पद्य अनुवाद किया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्वान साहित्यकार मांधाता राय ने कहा कि पाठक जी एक महान साहित्यकार थे और उन्होंने गाजीपुर में एक साहित्यिक पीढ़ी का निर्माण करने में अभूतपूर्व योगदान किया ।इस अवसर पर एक काव्य गोष्ठी का अभियान आयोजन हुआ जिसकी शुरुआत वीर रस के कवि दिनेश चंद्र शर्मा ने पाठक जी को याद करते हुए अपनी एक कविता सुनाई ‘”वर्षों बीत गए आपको गंगा में समाहित हुए। फिर भी नयन है आपकी आत्मा के लिए “युवा गजलकार गोपाल गौरव ने सुनाया “फंस गए मजधार आखिर किस लिए ?हाथ में पतवार आखिर किस लिए? तू मोहब्बत का पुजारी है अगर? हाथ में तलवार आखिर किस लिए?” हरिशंकर पांडे ने अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को सोचने पर विवश किया उन्होंने अपनी कविता ‘पिता ‘सुनते हुए सुनाया” सब तरक्की के सोपान चढ़ तो रहे ,इस तरक्की में अब लापता है पिता।  है कैसी जमाने की रफ्तार है ,      आंकता , भांपता,मापता है पिता।। आशुतोष श्रीवास्तव ने अपनी व्यंग्य रचना सुनाई “इंसान था या कागज का पुलिंदा ,राशन कार्ड में मर गया, आधार में था जिंदा। अपने घर का ,न घाट का ,वह बन गया खरबंदा।। गाजीपुर के वरिष्ठ गजल कार कुमार नागेश ने अपनी मधुर आवाज में “अंधेरी रातों का बादल हुआ हूं ।है मेरा चांद कहां पागल हुआ हूं ।।सुनकर के श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया ।साहित्य चेतbना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर ‘ने अपनी व्यंग्य रचना “जाऊं विदेश तो किस देश ?बहुत सोचा, दिमाग दौड़ाया,अंत में अपना देश ही भाया” सुनाया ।।डॉक्टर संतोष कुमार तिवारी ने अपनी रचना इस विसंगत दौर में सुनाया ‘ओ जागृत विवेक !संभालो हमें ,रोशनी दो ,बख्शो हमें ,मोहब्बतों की सल्तनत और समझा दो उन मदांध अहंताओं को, कि समुद्र शांत रहने पर ही विराट और सुंदर लगता है।। विचार -गोष्ठी और काव्य -गोष्ठी दोनों का संचालन डी.ए.वी. इंटर कॉलेज के अध्यापक डॉ संतोष कुमार तिवारी और कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ मांधाता राय ने की।

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