लखनऊ। कला एवं शिल्प महाविद्यालय लखनऊ विश्वविद्यालय में आज राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस मनाया गया। इस अवसर पर हस्तशिल्प की अनेक विधाओं के प्रदर्श प्रदर्शित किए गए कार्यक्रम का उद्घाटन ललित कला विभाग के प्रधानाचार्य एवं संकाय अध्यक्ष आचार्य डॉ.रतन कुमार एवं आचार्य आलोक कुमार द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।इस अवसर पर बोलते हुए प्रधानाचार्य डॉ रतन कुमार जी ने बताया कि हमारे टेक्सटाइल विभाग के छात्रों ने लगातार उल्लेखनीय कार्य करते हुए महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया है हमारे छात्र अनेक संस्थाओं में टेक्सटाइल विभाग मे ऊंचे पदों पर कार्य करते हुए महाविद्यालय की गरिमा बढ़ा रहे हैं। उद्घाटन करते हुए आचार्य आलोक कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय हस्तशिल्प सदैव दुनिया का आकर्षण रहा है और आज के डिजिटल युग में भारतीय संवेदनाओं इनके मोटिफ और प्रतीकों को लेकर अत्यधिक डिजाइन में मांग बढ़ी है और यह कहना गलत नहीं होगा कि युवाओं की पहली पसंद बनी है। कार्यक्रम के अतिथियों एवं गणमान्य विभूतियां में डॉ. पूनम जायसवाल,किरण आर्या जी,आचार्य रविकांत पांडे,श्री अमरनाथ गौर एवं सुमित कुमार सम्मिलित थे। इस कार्यक्रम का आयोजन डॉक्टर पूनम जायसवाल द्वारा किया गया इस अवसर पर हस्तशिल्पों से संबंधित अनेक विधाओं एवं आंचलिक वस्त्र कल्पना के सुंदर उदाहरण विद्यार्थियों एवं युवा कलाकारों के समक्ष प्रस्तुत किए एवं उनके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के बारे में उदाहरण सहित आचार्य आलोक कुमार ने चर्चा की। आचार्य आलोक कुमार ने बताया कि भारतीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत वस्त्र विधायें किस तरह वैश्विक स्तर पर संस्कृति को प्रभावित करते हैं और भारतवर्ष के महत्व एवं आकर्षक को दुनिया के सामने रखते हैं। शिक्षक सुमित कुमार ने पूरे कार्यक्रम को प्रलेखित करते हुए युवा कलाकारों को कला की गतिविधियों के प्रलेखन की ओर आने को प्रेरित किया।

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