वाराणसी। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भारत कला भवन में “धागों से बेहतरीन परिधान तक” विषय पर एक खास बातचीत आयोजित की गई। इसमें बनारस के ब्रोकेड (खास तरह की बुनाई वाली साड़ियों) की विरासत और आज के समय में उनकी अहमियत पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय और संत कबीर अवॉर्ड पाने वाले कलाकार कमालुद्दीन अंसारी और युवा कलाकार मोहम्मद मुज़म्मिल ने हथकरघा की अहम भूमिका पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि कैसे हथकरघा टिकाऊ फैशन का एक विकल्प है और सदियों पुरानी भारतीय विरासत को बचाए रखने में मदद करता है। इस कार्यक्रम के बारे में बात करते हुए, भारत कला भवन के निदेशक प्रो0 श्रीरूप रायचौधुरी ने कहा, “यह बातचीत कारीगरों के कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हमारा विश्व-प्रसिद्ध टेक्सटाइल कलेक्शन एक अहम कड़ी का काम करता है, जो आज के बुनकरों को प्रेरित करने के साथ-साथ बनारस की अमूल्य विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भी रखता है।” खास तौर पर, वक्ताओं ने भारत कला भवन संग्रह में सुरक्षित ऐतिहासिक बनारसी उत्कृष्ट कृतियों के महत्व पर ज़ोर दिया। डिज़ाइन, बारीक कारीगरी और सांस्कृतिक प्रमाणिकता के अहम उदाहरण होने के नाते, ये म्यूज़ियम आर्काइव आधुनिक बुनकरों और शोधकर्ताओं के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा हैं, जो इस कला की असलियत को बचाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। भारत कला भवन कारीगरों की आजीविका को सहारा देकर और हथकरघा को बचाने के लिए बातचीत को बढ़ावा देकर विरासत और आज के समय की टिकाऊपन के बीच तालमेल बिठाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस कार्यकर्म का संचालन डॉ0 प्रियंका चन्द्रा ने किया जो संग्रहालय में वसन विभाग की प्रभारी है । इस अवसर पर भारत कला भवन के सहायक संग्रहाध्यक्ष डॉ0 देवेन्द्र बहादुर सिंह, डॉ0 दीपक भरथन अलथुर के साथ-साथ भारत कला भवन के अनुभाग अधिकारी मुन्ना लाल पाल एवं कला भवन के अन्य कर्मचारी और विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।
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