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दैनिक आचरण और प्रशासनिक प्राथमिकताओं का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए पर्यावरण सुरक्षा- कुलपति जेपी सैनी

लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर (Green Campus) के संकल्प को साकार करते हुए एक प्रेरणादायी और ऐतिहासिक पहल की है। विश्वविद्यालय के द्वितीय परिसर (Second Campus, जानकीपुरम) में निर्माण एवं विकास कार्यों के दौरान आड़े आ रहे 115 बड़े वृक्षों को काटने के बजाय उनका वैज्ञानिक तकनीक से सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांटेशन (प्रत्यारोपण) किया गया है। महत्वपूर्ण ये भी है की  इस प्रक्रिया को संपादित करने के लिए वन विभाग से पूर्वानुमति प्राप्त की गई थी |वन विभाग ने इन पेड़ों को काटने / प्रत्यारोपित की अनुमति दी थी लेकिन विश्वविद्यालय ने अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए इन पेड़ों को प्रत्यारोपित किया | साथ ही नियमानुसार एक पेड़ की जगह 10 पेड़ लगाने का पालन करते हुए 1115 की बजाय 2000 से ज्यादा  फलदार,छायादार एवं औषधीय पौधे  जियो टैगिंग के साथ लगाए गए|  यह पहल दर्शाती है कि लखनऊ विश्वविद्यालय केवल उच्च शिक्षा ही नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) और प्रकृति के संरक्षण के प्रति भी पूरी तरह संवेदनशील व सजग है।तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास के दौर में अक्सर वृक्षों को काट दिया जाता है, जिससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंचती है। परंतु लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने ‘विकास भी, पर्यावरण संरक्षण भी’ की प्रगतिशील नीति अपनाते हुए यह साबित किया है कि आधुनिक तकनीक और दृढ़ इच्छाशक्ति से पुराने और घने पेड़ों को जीवनदान दिया जा सकता है। प्रत्यारोपित किए गए इन 115 वृक्षों में शीशम और अमरूद  जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां शामिल हैं, जो परिसर के जैव-विविधता संतुलन को बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।इस पर्यावरण-अनुकूल पहल पर अपने विचार व्यक्त करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने कहा:”पर्यावरण और प्रकृति का संरक्षण केवल कागजी विमर्श का विषय नहीं, बल्कि हमारे दैनिक आचरण और प्रशासनिक प्राथमिकताओं का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। लखनऊ विश्वविद्यालय अपने दोनों परिसरों को पूर्णतः हरित, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। द्वितीय परिसर में 115 पेड़ों का वैज्ञानिक प्रत्यारोपण हमारे इसी दृष्टिकोण का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि हम बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रकृति की बलि नहीं दे सकते। हमारे लिए प्रत्येक वृक्ष अमूल्य है, जो आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध प्राणवायु और स्वस्थ वातावरण प्रदान करता है। विश्वविद्यालय समाज के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत कर रहा है कि पर्यावरण के साथ तालमेल बिठाकर ही सतत विकास संभव है।”अधीक्षक भूमि एवं उद्यान विभाग डॉ. सुभान आलम एवं सहायक अधीक्षक डॉ  रचना पाठक का तकनीकी नेतृत्व और भूमिका:इस जटिल और संवेदनशील कार्य को कुशलतापूर्वक संपन्न कराने में विश्वविद्यालय के अधीक्षक भूमि एवं उद्यान विभाग डॉ. सुभान आलम और उनकी तकनीकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वैज्ञानिक प्रक्रिया का पालन: डॉ. सुभान आलम की देखरेख में पेड़ों की जड़ों (Root ball) को सुरक्षित रखते हुए, विशेष हाइड्रोलिक मशीनों और क्रेन की सहायता से उन्हें एक स्थान से उठाकर नए चिन्हित स्थलों पर स्थानांतरित किया गया। विशेष उपचार एवं देखभाल: ट्रांसप्लांटेशन से पूर्व और पश्चात पेड़ों को सूखने व फंगस से बचाने के लिए जरूरी रूट-हार्मोन, एंटी-फंगल दवाएं और पोषणयुक्त मृदा उपचार प्रदान किया गया, ताकि वृक्ष नए स्थान पर तेजी से जड़ें जमा सकें। निरंतर निगरानी: प्रत्यारोपित किए गए सभी 115 पेड़ों के नियमित पोषण, जल आपूर्ति और सर्वाइवल रेट की निरंतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है। विश्वविद्यालय की इस अनूठी और दूरदर्शी पहल की पर्यावरणविदों, शिक्षकों, अधिकारियों और छात्र-छात्राओं द्वारा व्यापक सराहना की जा रही है।

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