गाजीपुर। ग्राम शेरपुर कलां, विकासखंड भांवरकोल, तहसील मोहम्मदाबाद, जनपद गाजीपुर स्थित सरकारी New PHC ग्रामीण जनता के लिए बनाई गई है, लेकिन यहां तैनात चिकित्सक एवं अन्य कर्मचारियों की वास्तविक उपलब्धता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। शिकायत का आधार किसी व्यक्ति के विरुद्ध व्यक्तिगत आरोप नहीं, बल्कि यह सार्वजनिक हित का गंभीर प्रश्न है कि सरकारी वेतन प्राप्त करने वाला चिकित्सक निर्धारित समय पर अस्पताल में उपस्थित रहता है या नहीं, मरीजों को नियमित OPD सुविधा मिलती है या नहीं और उसकी उपस्थिति को किस अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया जाता है। अतः मांग है कि जनवरी 2024 से अब तक की Attendance, Biometric Attendance, OPD Register, Duty Roster, वेतन प्रमाणन, अवकाश, अटैचमेंट तथा अन्यत्र ड्यूटी से संबंधित सभी अभिलेखों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। वर्तमान में शेरपुर PHC में तैनात डॉक्टर एवं सभी कर्मचारियों के नाम, पदनाम, तैनाती की तारीख, निर्धारित ड्यूटी और सरकारी संपर्क नंबर अस्पताल में सार्वजनिक रूप से चस्पा कराए जाएं। यदि डॉक्टर को शेरपुर PHC की ड्यूटी से किसी अन्य अस्पताल, CHC या कार्यालय में अटैचमेंट, विशेष छूट या अन्य व्यवस्था के माध्यम से अलग रखा गया है तो यह स्पष्ट किया जाए कि किस अधिकारी ने, किस आदेश के आधार पर और कितनी अवधि के लिए इसकी अनुमति दी। इस मामले में केवल डॉक्टर की भूमिका ही नहीं बल्कि CHC प्रभारी, CMO तथा अन्य संबंधित उच्च अधिकारियों की भूमिका की भी जांच आवश्यक है। यदि डॉक्टर नियमित रूप से अनुपस्थित रहे तो उनकी उपस्थिति किस अधिकारी ने प्रमाणित की, वेतन किस आधार पर जारी हुआ और निरीक्षण करने वाले अधिकारियों ने वास्तविक स्थिति क्यों नहीं पकड़ी, इसका जवाब भी जांच में सामने आना चाहिए। साथ ही यह गंभीर आशंका भी जांच का विषय बनाई जाए कि कहीं डॉक्टर की ड्यूटी में अनियमितता को बनाए रखने के बदले किसी स्तर पर उत्कोच या अनुचित आर्थिक लाभ तो नहीं पहुंचाया जा रहा था। इस आरोप की पुष्टि या खंडन केवल स्वतंत्र जांच, अभिलेखों और आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों के बयान के आधार पर किया जाए। इस सार्वजनिक शिकायत और जांच की मांग से सहमत ग्रामीणों में मदन दुबे,नीरज राय निवासी शेरपुर खुर्द, शिवम, अनिल राय मास्टर साहब तथा अन्य ग्रामीण शामिल हैं। मांग है कि जांच किसी स्थानीय अधीनस्थ अधिकारी से केवल औपचारिक रिपोर्ट मंगाकर समाप्त न की जाए, बल्कि सक्षम उच्च अधिकारी द्वारा मौके पर जाकर अस्पताल का भौतिक सत्यापन कराया जाए, Attendance और Biometric रिकॉर्ड का OPD Register से मिलान किया जाए तथा दोषी पाए जाने वाले डॉक्टर, कर्मचारी या अधिकारी की जिम्मेदारी निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। जांच रिपोर्ट और की गई कार्रवाई को शिकायतकर्ताओं के समक्ष स्पष्ट रूप से रखा जाए ताकि ग्रामीण जनता को यह विश्वास हो सके कि सरकारी अस्पताल वास्तव में जनता के लिए चल रहा है, केवल कागजों पर नहीं।
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