वाराणसी। भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्मोत्सव अक्षय तृतीया को मनाया जाता है। भगवान परशुराम के जन्मोत्सव पर इस बार सर्वार्थ सिद्ध, सौभाग्य योग और त्रिपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान परशुराम का अवतार हुआ था। इसलिए वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन प्रदोष काल में भगवान परशुराम की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। ज्योतिषाचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि काशी के पंचांगों के अनुसार द्वितीया तिथि 29 अप्रैल को रात 8:09 बजे तक है और उसके बाद तृतीया तिथि लग रही है। 30 अप्रैल को शाम 5:57 बजे तक ही तृतीया का मान रहेगा। 29 अप्रैल को समशृंग चंद्र दर्शन सामान्य है। सूर्यास्त के बाद छह घटी प्रदोष काल में तृतीया तिथि का भी मान हो जा रहा है। इसके कारण भगवान परशुराम का जन्मोत्सव 29 अप्रैल को ही मनाया जाएगा। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्ध योग, सौभाग्य योग और त्रिपुष्कर योग में सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में जन्मोत्सव का मुहूर्त मिल रहा है। इस तिथि पर श्री काशी विश्वनाथ धाम समेत शहर के सभी मंदिरों में जन्मोत्सव के अनुष्ठान संपन्न होंगे।
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