लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पांच विद्यार्थियों क्रमशः आशी द्विवेदी, प्रतीक दुबे, अरविंद पासवान, और अक्षत राय (सिविल इंजीनियरिंग विभाग) तथा सुप्रिया सिंह (गणित एवं वैज्ञानिक संगणन विभाग) का चयन अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद्,नई दिल्ली की प्रतिष्ठित ए आई सी टी ई डॉक्टोरल फेलोशिप के लिए हुआ है। इस फेलोशिप के लिए चयन होने के बाद इन सभी छात्रों को ए आई सी टी ई, नई दिल्ली से पी एच डी अध्ययन के लिए प्रतिमाह रु. 37000 फेलोशिप मिलने लगेगी। इसके अतिरिक्त, सभी चयनित छात्रों को अन्य आकस्मिक व्यय के लिए रु. 15000 प्रति वर्ष, तथा सरकारी दरों के अनुसार अनुमन्य प्रतिमाह आवास किराया भत्ता लगभग रु. 6000 भी मिलेगा। पी एच डी के तीसरे वर्ष में पहुंचने पर मासिक फेलोशिप रु. 42000 हो जाएगी। फेलोशिप के लिए चयनित पांचों शोध छात्रों ने आज माननीय कुलपति महोदय के कार्यालय में मिलकर उनका आशीर्वाद लिया। माननीय कुलपति ने सभी चयनित विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की फेलोशिप प्राप्त करने के लिए बधाई दी और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने चयनित विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता का शोध करने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुसंधान और विकास के लिए कटिबद्ध है और उच्च गुणवत्ता के शोध के लिए कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। उच्च गुणवत्ता के शोध से विद्यार्थियों को, संस्थान को, समाज को, और राष्ट्र को सभी को लाभ मिलेगा। बताते चलें कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद्, नई दिल्ली द्वारा टेक्निकल ग्रेजुएट्स को पी एच डी के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ए आई सी टी ई डॉक्टरल फेलोशिप योजना शुरू की गई थी। इस योजना के अंतर्गत पूरे देश से आवेदन आमंत्रित किए जाते है और चुनिंदा विद्यार्थियों का ही राष्ट्रीय स्तर पर फेलोशिप हेतु चयन किया जाता है। इस वर्ष पूरे देश से मात्र 300 विद्यार्थियों का चयन किया गया है जिसमें से 5 एम एम एम यू टी के हैं।उल्लेखनीय है कि इस योजना के अंतर्गत फेलोशिप पाने के को विद्यार्थियों को एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त किसी विश्वविद्यालय या संस्थान में पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश लेना होता है। इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, डिजाइन, योजना, होटल प्रबंधन, कंप्यूटर अनुप्रयोग, या अनुप्रयुक्त कला जैसे क्षेत्रों में स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री में न्यूनतम 55% अंक या समकक्ष सीजीपीए प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी इस योजना के अंतर्गत आवेदन के पात्र होते हैं। इसके अलावा, उम्मीदवार को पिछले पांच वर्षों में गेट/जीपैट जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले शोध को बढ़ावा देना और शोधार्थियों को उनके शैक्षिक और अनुसंधान लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता प्रदान करना है। यह योजना तकनीकी संस्थानों में नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करती है, जिससे शोधार्थी पेटेंट दाखिल करने और उद्योगों के साथ सहयोग करने में सक्षम हो सकें। साथ ही, यह योजना शोधार्थियों को उनके करियर को मजबूत करने और तकनीकी क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है। यह भारत को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए शोध और नवाचार को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इस योजना के तहत शोध प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए उच्च वरीयता वाले कुछ क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं जैसे कि इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, डिजाइन, योजना, होटल प्रबंधन और खानपान प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर अनुप्रयोग, अनुप्रयुक्त कला, शिल्प और डिजाइन, अनुप्रयुक्त विज्ञान, और अंतर्विषयी क्षेत्र जिन्हें राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और तकनीकी विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस योजना के अंतर्गत शोधार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान कर उन्हें उद्योगों और स्टार्टअप्स के साथ सहयोगात्मक अनुसंधान के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़े।
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