गाजीपुर। गौरी स्थित पर्णकुटी में श्रद्धापूर्वक लव कुश जयंती मनाई गई। महंत अरुण दासजी ने मानस भवन में गोस्वामी तुलसीदास जी को माल्यार्पण कर उनकी स्तुति की। हिंगलाज सेना की राष्ट्रीय अध्यक्षा सुश्री लक्ष्मीमणि शास्त्री जी ने कथा श्रवण करा श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। लक्ष्मीमणि शास्त्री ने कहा कि वैदिक शिक्षा का महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह न केवल ज्ञान प्रदान करती है बल्कि नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक विकास और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करती है। वैदिक शिक्षा छात्रों को विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक कौशल भी सिखाती है जैसे कृषि, व्यापार, कला और संगीत आदि यह छात्रों को जीवनयापन के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करती है। भगवान श्रीराम के जुड़वा पुत्र लव और कुश का जन्म वाल्मीकि ऋषि के आश्रम में श्रावण मास की पूर्णिमा को हुआ था। लव एवं कुश की शिक्षा दीक्षा से लेकर विभिन्न कलाओं में निपुण होने के पीछे महर्षि वाल्मीकि का ही हाथ रहा। उन्होंने ही दोनों राजकुमारों को हर तरह की शिक्षा और विद्या में परंगत किया। बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण करते हुए बच्चों में आध्यात्मिक सुसंस्कृत सदाचार गुण सीखने का संकल्प लिया। वेद प्रकाश त्रिपाठी ने सभी संत जनों का स्वागत सम्मान किया।
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