शिवकुमार
वाराणसी। डा. विजय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज टोल प्लाजा कैथी वाराणसी में चल रहे निःशुल्क पंचकर्म वेलनेस सेंटर में रोगियों की भीड़ लग रही है। इस आयुर्वेदिक चिकित्सा की लोकप्रियता कुछ ही समय में पूरे पूर्वांचल में फैल गयी है। जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों के अलावा आम आदमी भी इस पंचकर्म चिकित्सा के आकर्षण से प्रभावित होकर डा. विजय मेडिकल कालेज के वेलनेस सेंटर में पहुंच रहे हैं। संस्थान के चेयरमैन डॉ विजय यादव व उनकी टीम डॉक्टर उमेश कुमार, डॉ प्रीति रंजन बेहरा ,डॉ सिद्धार्थ यादव की टीम ने विस्तारपूर्वक बताया कि आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्सा को शरीर की संपूर्ण शुद्धि और संतुलन बनाए रखने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है। पंचकर्म पांच प्रमुख प्रक्रियाओं का एक समूह है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और स्वास्थ्य को पुनर्स्थापित करने में सहायता करता है। यह न केवल विभिन्न रोगों का उपचार करता है, बल्कि शरीर की प्राकृतिक शक्ति को पुनः जागृत करता है।
पंचकर्म क्या है?
पंचकर्म का अर्थ है पाँच विशिष्ट प्रक्रियाएँ, जो शरीर को शुद्ध करके उसे स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने में सहायक होती हैं। ये प्रक्रियाएँ निम्नलिखित हैं: वमन (Vomana): यह प्रक्रिया शरीर से कफ दोष को निकालने के लिए की जाती है। यह मुख्य रूप से श्वसन संबंधी समस्याओं, मोटापा, त्वचा रोग, और एलर्जी में अत्यंत प्रभावी होती है। विरेचन (Virechana): यह पित्त दोष को संतुलित करने में सहायक होती है। इस प्रक्रिया से यकृत और आंतों की गहराई से सफाई होती है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएँ, एसिडिटी, त्वचा विकार और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है। बस्ती (Basti): यह वात दोष को संतुलित करने के लिए आयुर्वेदिक औषधीय तेलों या काढ़े द्वारा एनिमा देने की प्रक्रिया है। यह गठिया, न्यूरोलॉजिकल विकार, जोड़ दर्द और अपच जैसी समस्याओं में अत्यंत लाभकारी होती है। नस्य (Nasya): नाक के माध्यम से औषधीय तेलों या काढ़े का सेवन कराया जाता है। यह साइनस, माइग्रेन, सिरदर्द, एलर्जी और स्नायु तंत्र की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। रक्तमोक्षण (Raktamokshana): यह प्रक्रिया रक्त शुद्धि के लिए की जाती है और एक्जिमा, फोड़े-फुंसी, सोरायसिस और रक्त विकारों को दूर करने में सहायक होती है।
पंचकर्म के प्रमुख लाभ
शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालकर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना
पाचन तंत्र को सुधारना और चयापचय (Metabolism) को बढ़ाना
रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाना
मानसिक शांति और तनाव मुक्त जीवन प्रदान करना
त्वचा की चमक और बालों के स्वास्थ्य में सुधार करना
आयुर्वेदिक औषधियों के प्रभाव को बढ़ाना और शरीर की हीलिंग प्रक्रिया में सहायता करना
शरीर की ऊर्जा स्तर को बढ़ाना और थकान को कम करना
पंचकर्म किन्हें कराना चाहिए?
जो लोग बार-बार बीमार पड़ते हैं और शरीर में कमजोरी महसूस करते हैं।
जिनका पाचन तंत्र कमजोर है और जिन्हें बार-बार गैस, अपच, और एसिडिटी की समस्या होती है।
तनाव, चिंता और नींद न आने की समस्या वाले व्यक्ति।
त्वचा और बालों की समस्याओं से ग्रस्त लोग।
मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग और गठिया से पीड़ित लोग।
जो लोग आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न बीमारियों से राहत चाहते हैं।
पंचकर्म करवाने से पहले और बाद में ध्यान देने योग्य बातें
चिकित्सक की सलाह अवश्य लें: पंचकर्म चिकित्सा को हमेशा प्रशिक्षित आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही करवाना चाहिए। प्राकृतिक और सात्विक आहार लें: पंचकर्म के दौरान हल्का और सुपाच्य भोजन करें, जिससे शरीर को शुद्धि प्रक्रिया में मदद मिले। शरीर को पर्याप्त आराम दें: पंचकर्म के बाद कुछ दिनों तक आराम करना आवश्यक है ताकि उपचार का पूरा लाभ मिल सके। ध्यान और योग अपनाएँ: पंचकर्म के बाद योग और ध्यान से मानसिक और शारीरिक संतुलन बना रहता है। पंचकर्म एक गहन आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रिया है, जो न केवल शरीर को शुद्ध करती है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन भी प्रदान करती है। यदि आप अपने स्वास्थ्य को प्राकृतिक रूप से सुधारना चाहते हैं और दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ना चाहते हैं, तो पंचकर्म आपके लिए एक उत्तम विकल्प हो सकता है। यदि आप पंचकर्म चिकित्सा से संबंधित अधिक जानकारी चाहते हैं, डॉक्टर विजय आयुर्वेदिक पंचकर्म वेलनेस सेंटर कैथी वाराणसी पर आयुर्वेद व पंचकर्म विभाग में संपर्क कर सकते है| पंचकर्म चिकित्सा के संदर्भ में जमानियां ब्लाक के प्रमुख प्रतिनिधि संतोष कुशवाहा ने बताया कि यह आयुर्वेदिक चिकित्सा वर्तमान समय में हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है क्योंकि इस चिकित्सा से शरीर में रोग को रोकने के लिए प्रति रोधक क्षमता बढ़ती है। और इसका साइड इफेक्ट नही होता है। इस चिकित्सा से हमे बहुत लाभ हुआ है।
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