शिवकुमार
गाजीपुर। शहीद पुत्र अवधेश राय शास्त्री को नेहरू जी ने अपनी गोद में उठाकर उन्हे पुचकारते हुए शेरपुर में कहा था कि शेरपुर के जो आठ लोग शहीद हुए है अगर यह 18 अगस्त 1942 को मुहम्मदाबाद तहसील पर शहीद नही होते तो आजादी विधवा बनकर रह जाती और यह बच्चा शहीदो का नाम रोशन करेगा। नेहरू जी का यह वाक्य आगे चलकर शत-प्रतिशत सही हुए। अवधेश राय शास्त्री ने जीवनपर्यत्न अपने ईमानदारी और नीति सिद्धांत से समझौता नही किया और अष्ट शहीदो का नाम कभी भी झुकने नही दिया। 18 अगस्त 1942 को मुहम्मदाबाद तहसील मुख्यालय पर अंग्रेजो का झंडा लहरा रहा था, पूरे देश में क्रांति की ज्वाल धधक रही थी, हर तरफ अंग्रेजो भारत छोड़ो का नारा लग रहा था, ऐसे वातावरण शिवपूजन राय के नेतृत्व में शेरपुर के आठ भारत माता के वीर सपूत तहसील मुख्यालय पर लगा अंग्रेजो का झंडा उतारकर भारत का तिरंगा लहराने के लिए लगाने लगें तभी अंग्रेज सिपाहियो ने गोलियां चलानी शुरू कर दी, एक के बाद एक आठ वीर सपूत शहीद हो गये लेकिन भारत मां का झंडा नीचे गिरने नही दिया। इन शहीदो में अवधेश राय शास्त्री के पिता नारायण राय भी थे। इस दुखद घटना की खबर जवाहर लाल नेहरू को लगी तो वह तुरंत शेरपुर आये और शहीद परिवारो से मिलें। उस समय में अवधेश राय शास्त्री केवल दो माह के थे। नेहरू जी ने उनको गोदी में उठाकर उनकी भविष्यवाणी की थी कि शहीदो को नाम यह बच्चा रोशन करेगा। तत्कालीन कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव स्व. राजीव गांधी का कार्यक्रम मुहम्मदाबाद शहीद पार्क में था जब राजीव गांधी ने वहां पर आठ शहीदो के कलश को देखा तो इसके बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होने कहा कि शहीद के परिवार से किसी लड़के का नाम भेजिए पार्टी एमएलए का टिकट देगी। इसके बाद तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष बीपी सिंह ने अष्ट शहीद को आधार मानकर अवधेश राय शास्त्री को टिकट दिया और वह दिलदारनगर विधानसभा से विधायक बनें। अवधेश राय शास्त्री के निधन पर पूरा जनपद शोकाकुल है।
Purvanchal News जोड़े आपको पूर्वांचल से….